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माइकल बेवन महान फिनिशर थे; एक बार ऑस्ट्रेलिया 38 रन पर छह विकेट गंवा चुका था, फिर भी बेवन ने नाबाद रहते हुए मैच जिता दिया था

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माइकल बेवन ऑस्ट्रेलिया के महानतम वनडे बल्लेबाजों और क्रिकेट के शुरुआती महान “फिनिशरों” में गिने जाते हैं। उनकी खासियत सिर्फ रन बनाना नहीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में ऑस्ट्रेलिया को मैच जिताकर वापस ले जाना थी।

 

माइकल बेवन की सबसे बड़ी ताकत क्या थी
बेवन आमतौर पर मध्यक्रम में, खासकर नंबर 5-6 के आसपास बल्लेबाजी करते थे। जब शुरुआती बल्लेबाज आउट हो जाते और लक्ष्य मुश्किल दिखाई देता, तब बेवन की भूमिका शुरू होती थी।

उनकी बल्लेबाजी की कुछ खास बातें थीं
स्थिति को तुरंत समझना, कितने रन चाहिए, कितने ओवर बाकी हैं और कौन गेंदबाज खतरनाक है।
जोखिम कम रखना-हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के बजाय सिंगल-डबल लेकर रनरेट बनाए रखना।
अंतिम ओवरों में तेजी बढ़ाना- शुरुआत में संयम और अंत में आक्रामक बल्लेबाजी।
टेल-एंडर्स के साथ भी साझेदारी करना-कमजोर बल्लेबाज को स्ट्राइक से बचाते हुए खुद रन बनाना।
दबाव में शांत रहना-यही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भी उनके इसी गुण को उनकी फिनिशिंग क्षमता की आधारभूत विशेषता बताया है।

आंकड़े उनकी क्षमता बताते हैं
बेवन ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 232 वनडे में 6,912 रन बनाए और उनका बल्लेबाजी औसत 53.58 रहा। उन्होंने 6 शतक और 46 अर्धशतक लगाए।

खास बात यह है कि उनका औसत उस दौर के वनडे क्रिकेट में असाधारण था। वह केवल तेजी से रन बनाने वाले बल्लेबाज नहीं थे, बल्कि लक्ष्य का पीछा करते समय अपनी पारी को परिस्थितियों के अनुसार नियंत्रित करने वाले बल्लेबाज थे।

1996 का ऐतिहासिक मैच
उनकी फिनिशिंग क्षमता का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण 1 जनवरी 1996, सिडनी में वेस्टइंडीज के खिलाफ आया। ऑस्ट्रेलिया 173 रन का लक्ष्य पीछा कर रहा था और एक समय उसका स्कोर 6 विकेट पर 38 रन था। बेवन ने धैर्य नहीं खोया। उन्होंने पारी को संभाला और अंतिम गेंद पर चार रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया को एक विकेट से जीत दिलाई। वह 78 रन बनाकर नाबाद रहे।

2002 में फिर दिखाया कमाल
न्यूजीलैंड के खिलाफ 2002 में ऑस्ट्रेलिया 246 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 6 विकेट पर 82 रन तक पहुंच गया था। बेवन ने फिर निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ साझेदारियां बनाईं और 102 रन बनाकर नाबाद रहे। ऑस्ट्रेलिया ने मैच जीत लिया।

यही वजह थी कि उन्हें “The Finisher” कहा जाने लगा। बाद में एमएस धोनी, माइकल हसी जैसे बल्लेबाजों के साथ इस भूमिका की तुलना की गई, लेकिन बेवन ने 1990 के दशक में ही इस भूमिका का एक तरह से खाका तैयार कर दिया था।

बेवन ऐसे बल्लेबाज थे जिनके रहते ऑस्ट्रेलिया का मुश्किल लक्ष्य भी असंभव नहीं लगता था। वह तूफानी बल्लेबाजी से ज्यादा दिमाग, धैर्य, रनिंग बिटवीन द विकेट्स और आखिरी गेंद तक मैच को नियंत्रित करने के लिए प्रसिद्ध थे। यही कारण है कि उन्हें वनडे क्रिकेट का मूल/प्रारंभिक महान फिनिशर माना जाता है।

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