बदलता समय, संवेदना की तलाश

अवनीश कुमार गुप्ता स्मृतियाँ केवल अतीत की धरोहर नहीं होतीं, वे वर्तमान को समझने और भविष्य की दिशा पहचानने का माध्यम भी बनती हैं। जीवन की यात्रा में कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जो समय के साथ धुँधले नहीं पड़ते, बल्कि और अधिक स्पष्ट होकर हमारे भीतर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहते हैं। जब भी मैं समाज, संवेदना और समकालीन जीवन के संबंधों पर विचार करता हूँ, तब अनेक दृश्य स्मृति-पटल पर उभर आते हैं। वे दृश्य केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि उस युग की कहानी हैं जिसमें हम जी रहे हैं। बचपन के दिनों का समाज आज भी मेरी स्मृतियों में जीवित है। उस

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