जंतर-मंतर से उठते लोकतांत्रिक प्रश्न

अवनीश कुमार गुप्ता लोकतंत्र की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि नागरिक हर पाँच वर्ष में मतदान करते हैं। उसकी वास्तविक शक्ति इस बात में निहित होती है कि नागरिकों को प्रश्न पूछने, सरकार से जवाब मांगने और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी असहमति व्यक्त करने का कितना अवसर मिलता है। जब छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हों, सामाजिक कार्यकर्ता सार्वजनिक नीतियों पर संवाद की मांग करें और नागरिक समूह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात उठाएँ, तब किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा आरंभ होती है। हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों, सोनम वांगचुक के अनशन तथा

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