भारत में परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता की नई कसौटी

अवनीश कुमार गुप्ता भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली केवल योग्य अभ्यर्थियों के चयन का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में समान अवसर, सामाजिक न्याय और योग्यता आधारित प्रतिस्पर्धा का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। करोड़ों विद्यार्थी वर्षों तक कठिन परिश्रम, आर्थिक सीमाओं और मानसिक दबाव के बीच इस विश्वास के साथ तैयारी करते हैं कि उनकी सफलता का निर्धारण केवल उनकी प्रतिभा और मेहनत से होगा। यही विश्वास किसी भी परीक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी पूँजी है। जब प्रश्नपत्र लीक, संगठित नकल, फर्जी अभ्यर्थी, डिजिटल हैकिंग अथवा प्रशासनिक लापरवाही जैसी घटनाएँ सामने आती हैं, तब प्रभावित केवल एक परीक्षा नहीं होती, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की

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