संस्थाओं पर भरोसा, लोकतंत्र की कसौटी

अवनीश कुमार गुप्ता लोकतंत्र केवल चुनाव के दिन मत डालने की प्रक्रिया नहीं है। वह उस भरोसे का विस्तृत संसार है, जिसमें नागरिक यह विश्वास करता है कि उसके मत का मूल्य है, कानून सबके लिए समान है, न्यायालय निष्पक्ष होकर सुनेगा, प्रशासन बिना भेदभाव के काम करेगा और संवैधानिक संस्थाएँ अपने दायित्वों का निर्वहन किसी तत्काल राजनीतिक दबाव से स्वतंत्र होकर करेंगी। इसलिए लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती का आकलन केवल मतदान प्रतिशत, सरकार के गठन या राजनीतिक बहुमत से नहीं किया जा सकता। असली कसौटी यह है कि नागरिक उन संस्थाओं को कितना विश्वसनीय मानता है जिनके माध्यम से लोकतांत्रिक व्यवस्था उसके जीवन में

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ऊना : हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए जनता और कार्यकर्ताओं