शिमला : विधानसभा सत्र के समापन पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री का बजट तथ्य दूरदर्शिता और विकास से कोसों दूर है। पहली बार हिमाचल प्रदेश में गत वर्ष की अपेक्षा बजट में कमी आई है। सरकार द्वारा लगातार अपनी नाकामी का दोष केंद्र को दिया जा रहा है लेकिन हकीकत यह है कि केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल को भाजपा सरकार के मुकाबले ज्यादा धनराशि दी जा रही है। चिट्टा शराब खनन वन माफिया तांडव मचा रहा है। पंचायत चुनाव में मुख्यमंत्री लगातार झूठ बोल की रहे है। साजिशें कर रहे हैं। हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उनकी कोशिश नाकाम हो गई जिसके बाद चुनाव करवाना पड़ रहा है। लेकिन सरकार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। शूलिनी यूनिवर्सिटी में चार दिन से प्रदर्शन हो रहा है। एक छात्र ने यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप लगाते हुए आत्महत्या की है और सरकार कार्रवाई करना तो दूर जानकारी लेने और कुछ बोलने को तैयार नहीं है। शूलिनी यूनिवर्सिटी में जो हुआ दुर्भाग्यपूर्ण है।
जयराम ने कहा कि आज प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी में जो हालात बने हैं वह बहुत चिंताजनक, गंभीर और शर्मनाक है। सीएम सब जानने के बाद कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। हमने विधान सभा में मुद्दे को कई बार उठाया, लेकिन सीएम चुप हैं। संदिग्ध अधिकारियों को प्राइम पोस्टिंग दी गई हैं। उनकी हज़ार शिकायते हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई करना तो दूर मुख्यमंत्री कुछ कहने की स्थिति में नहीं हो पा रहे हैं। जबकि अधिकारी एक दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं। मुख्यमंत्री उन पर कार्रवाई नहीं कर सकते क्योंकि वह कॉम्प्रोमाइज हैं। संदिग्ध और दागी अधिकारियों को हटा वही व्यक्ति सकता है जो ख़ुद ठीक होगा। हमारी सरकार के जिन अधिकारियों पर जरा भी उँगली उठी हमने उन्हें हटाया और उन्ही अधिकारियों को आज मुख्यमंत्री सर माथे पर बैठाकर चल रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री आज किसी के ऊपर कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। पत्रकारों द्वारा अधिकारियों पर पूछे सवाल में उनके जवाब और तर्क शर्मनाक, हास्यास्पद तथा बचकाना हैं। उनकी खामोशी बता रही है कि सभी अधिकारियों पर मुख्यमंत्री का सच में संरक्षण है। उनकी विवशता पूरा प्रदेश देख रहा है।
व्यवस्था परिवर्तन में जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर रोकी जा रही है सहारा पेंशन
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री हर दिन कहते हैं की पेंशन किसी की नहीं रुकी जा रही है लेकिन सहारा पेंशन न देने के लिए जिंदा आदमी को मृत घोषित किया कर दिया जाता है। चौपाल के थारोच के एक दिव्यांग युवक रमेश कुमार जो लंबे समय से बेड सोर से पीड़ित है उन्हें सरकार ने मृत घोषित कर उनकी सहारा पेंशन नौ महीने से रोक दी है। हर दिन अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना वाले व्यक्ति को खुद को जिंदा साबित करने हेतु मशक्कत करनी पड़ रही है। यह सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति है।
सुक्खू सरकार को पूर्व सरकार से ज्यादा मिला रहा है केंद्र सरकार का सहयोग
हिमाचल प्रदेश को लगातार केंद्र से भरपूर सहयोग मिलता रहा है। बीते वित्तीय वर्ष तक हिमाचल को केंद्र सरकार को आरडीजी भी मिलती रही। अगर मैं आंकड़ों की बात करूं तो 15 वें वित्त आयोग की शुरुआत 2020-21 से होती है। हिमाचल प्रदेश को केंद्र द्वारा केंद्रीय हस्तांतरण, केंद्रीय करों में हिस्सेदारी, केंद्र प्रायोजित योजनाओं में अनुदान और विशेष सहायता के तहत 50 साल के लिए ब्याज मुक्त ऋण के रूप में वर्ष 2021-22 में 25350 करोड़ रुपए, 2022-23 में 23073 करोड़ रुपए, 2023 24 में 25815 करोड रुपए 2024 25 में 25813 करोड रुपए 202526 में 26540 करोड रुपए, 2026 27 में यानी आने वाले वर्ष में 25634 करोड रुपए हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार द्वारा मिलेंगे। केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल को मिलने वाली केंद्रीय प्राप्तियां 2021-22 और 22- 23 यानी की भाजपा सरकार के मुकाबले कांग्रेस सरकार में लगातार ज्यादा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में हिमाचल प्रदेश को भारतीय जनता पार्टी के आखिरी कार्यकाल के मुकाबले लगभग ढाई हजार करोड रुपए ज्यादा मिलेंगे। इसके बाद भी सरकार हर दिन यही कहती है कि उन्हें केंद्र सरकार द्वारा कोई मदद नहीं मिल रही है।




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