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इस बार 14 नोबेल पुरस्कार विजेताओं में आधे अमेरिकी; पांच को दो-दो बार नोबेल, पौलैंड की मैरी क्यूरी भौतिकी व रसायन दोनों में नोबेल जीत चुकीं

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आज नोबेल पुरस्कारों की गहराई में जाते हैं। नोबेल पुरस्कारों का मौसम भी है। मौसम इसलिए, कि अक्टूबर में इनकी घोषणा होती है। इसी महीने 21 अक्टूबर को स्वीडन के महान आविष्कारक और इंजीनियर अल्फ्रेड नोबेल का जन्म हुआ था। पुरस्कार 10 दिसंबर को अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर दिए जाते हैं। यह तय रहता है कि अक्टूबर के पहले और दूसरे सप्ताह के दौरान नामों की घोषणा होती है। यानी जिनको इंतजार रहता है, उनको ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ता कि पुरस्कारों की घोषणा कब होगी। निसंदेह यह दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार है। पुरस्कारों की भौतिकी, रसायन, चिकित्सा, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र छह श्रेणियां हैं। वर्ष 2025 में छह श्रेणियों में 14 वैज्ञानिकों, लेखकों, अर्थशास्त्रियों व राजनीतिज्ञों को पुरस्कार के लिए चुना है। भौतिकी, रसायन, चिकित्सा और अर्थशास्त्र में तीन-तीन, शांति और साहित्य में एक-एक नाम की घोषणा हुई है। इन चौदह लोगों में सात अमेरिकी व दो जापानी हैं। आस्ट्रेलिया, कनाडा, हंगरी, वेनेजुएला व फ्रांस के एक-एक नागरिक हैं। तीन अर्थशास्त्रियों में एक जोएल मोकिर (नीदरलैंड-अमेरिका) के हैं। भौतिकी के तीनों पुरस्कार विजेता और चिकित्सा के तीन में से दो विजेता अमेरिकी हैं। यह तो हुई इस वर्ष की बात।

इन पुरस्कारों के इतिहास पर नजर
नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत 1901 में हुई। अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार की स्थापना 1968 में हुई और पहला पुरस्कार 1969 में प्रदान किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1940, 1941 व 1942 में नोबेल पुरस्कार नहीं दिए। वर्ष 2025 तक लगभग 633 नोबेल पुरस्कार दिए गए। लगभग 1,026 व्यक्तियों और संगठनों पुरस्कार दिए गए। अमेरिकियों को सबसे अधिक 430 नोबेल पुरस्कार मिले। यदि दुनिया में कुल देशों की संख्या 195 मानकर चलें तो बाकी के 194 देशों को 33 प्रतिशत मिले। अमेरिका के अतिरिक्त इंग्लैंड 143, जर्मनी 115, फ्रांस 77, स्वीडन 34, जापान 32, रूस 31, कनाडा 29, स्विट्जरलैंड 25 व आस्ट्रिया 25 पुरस्कार जीतने वाले पहले दस देश हैं। क्या अमेरिका के प्रभाव या दबाव में ये पुरस्कार दिए जाते होंगे? ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। यदि ऐसा होता तो इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी नोबेल पुरस्कार मिल जाता।

पांच वैज्ञानिकों को दो-दो नोबेल मिले
कुछ वैज्ञानिकों को दो बार नोबेल पुरस्कार मिल चुका है। पोलैंड की मैरी क्यूरी को 1903 में भौतिकी और 1911 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार मिला। अमेरिका के लिनस पालिंग को रसायन विज्ञान में 1954 और शांति के लिए 1962 में नोबेल पुरस्कार दिया गया। अमेरिका के जॉन बार्डीन को भौतिकी में 1956 और 1972 में नोबेल मिला।इंग्लैंड के फ्रेडरिक सेंगर को 1958 में प्रोटीन की संरचना और 1980 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार मिला। अमेरिका के कार्ल बैरी शार्पलेस को 2001 और 2022 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार दिया गया। अंतरराष्ट्रीय रेडक्रास समिति को तीन बार (1917, 1944 और 1963) नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त (UNHCR) को दो बार (1954 और 1981) में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया।

अमेरिका के चार राष्ट्रपतियों को नोबेल
अमेरिका के चार राष्ट्रपतियों को नोबेल पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें थियोडोर रूजवेल्ट को 1906, वुडरो विल्सन को 1919, जिम्मी कार्टर को 2002 और बराक ओबामा को 2009 में नोबेल पुरस्कार दिया गया। एक अमेरिकी उपराष्ट्रति अल गोर को 2007 में नोबेल पुरस्कार मिला। अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर को 1973 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया। विश्व के अन्य बड़े नेताओं में, सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव को 1990 में नोबेल पुरस्कार मिला। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला को 1993 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। फिलिस्तीनी नेता यासर अराफात 1994 में नोबेल पुरस्कार के हकदार बने। भारत के किसी भी नेता को अब तक नोबेल पुरस्कार नहीं मिला है।

एशियाई देशों की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं
नोबेल पुरस्कारों के मामले में एशियाई देशों का रिकार्ड ज्यादा अच्छा नहीं है। एशिया में जापान 33 पुरस्कारों के साथ पहले स्थान पर है। जापान के बाद चीन का क्रम आता है, जिन्होंने 13 पुरस्कार जीते हैं। नौ भारतीयों (कुछ साइट्स का 12 का भी दावा है) को नोबेल पुरस्कार मिले। पाकिस्तानियों के नाम दो पुरस्कार हैं।

स्वहित के बजाय सर्वहित को प्राथमिकता
जिन भी वैज्ञानिकों, राजनेताओं, लेखकों व अर्थशास्त्रियों को नोबेल पुरस्कार मिले। मुझे लगता है या मेरा मानना है कि उन्होंने स्वहित को त्यागकर सर्वहित पर काम किया। समाजहित व विश्वहित उनके टारगेट में रहा, जो उनके योगदान में दिखता भी है। इनको तो नोबेल मिल गया, लेकिन इन्होंने अपने काम से दुनिया को भी कुछ न कुछ दिया। कई नोबेल विजेता तो पुरस्कार के रूप में मिलने वाली राशि 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना ( लगभग 10.36 करोड़ भारतीय रुपये) भी दान कर गए या ली नहीं।

(श्री देवेंद्र गुलेरिया जी की फेसबुक वॉल से आभार सहित)

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Author: speedpostnews

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