धर्मशाला : बरसात चली गई। मानसून भी बुधवार को लौट गया, लेकिन सलोल, लंज और नगरोटा सूरियां के लोगों को बड़ा दर्द दे गया। बरसात के लगभग तीन महीने तो ठीक निकल गए। सलोल के आसपास सड़कें ज्यादा प्रभावित नहीं हुईं। बसें भी चलती रहीं। लेकिन अब 15 सितंबर को जाती बरसात ने ऐसा जख्म दिया है, जिसे भरने में महीने लग सकते हैं। असल में गगल-सलोल-लंज-नगरोटा सूरियां सड़क पर दरवाह के पास 15 सितंबर को डंगा गिर गया है। यह मार्ग बड़े वाहनों के लिए बंद हो गया है। इससे लंज व सलोल के आसपास के गांवों के लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है। ज्यादा परेशानी कर्मचारियों, स्कूल-कालेज जाने वाले विद्यार्थियों व रोज आने-जाने वाले लोगों को है। निजी स्कूलों के छोटे बच्चों को बहुत परेशानी हो रही है।
इस मार्ग से अधिकतर लोगों को मेडिकल कालेज टांडा व जिला मुख्यालय धर्मशाला आना-जाना होता है। जहां पर डंगा धंसा है, उस स्थान पर सड़क संकरी हो गई है। बाइक व कार मुश्किल से निकल पा रही हैं। बस सेवा पूरी तरह से बंद है। लोक निर्माण विभाग नए सिरे से डंगा ही लगा सकता हैं। क्योंकि दोनों तरफ गहरी खाई है, इसलिए डायवर्जन बनाना संभव नहीं है। लोग चाहते हैं कि तब तक बस सेवा की वैकल्पिक व्यवस्था हो जाए तो परेशानी कम हो सकती है।
इस मार्ग पर दिन में लगभग 10 बसें लंज या नगरोटा सूरियां तक जाती हैं और इतनी ही बसें वापस आती हैं। सलोल, तरखानकड़, ततवानी, बोहड़क्वालू और यहां तक कि लंज से भी कई विद्यार्थी तियारा और गगल के निजी स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। धर्मशाला कालेज व आइटीआइ सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में कई विद्यार्थी पढ़ते हैं। कुछ विद्यार्थी स्कूल बसों में भी आवाजाही करते हैं, कुछ निगम व निजी बसों से भी आते-जाते हैं। छोटे बच्चों व उनके अभिभावकों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही है। कुछ स्कूलों ने गिरे डंगे के दोनों तरफ से बसें लगाई हैं। एक बस सलोल की तरफ से आती है और गिरे डंगे से पहले विद्यार्थियों को उतार देती है, विद्यार्थी क्षतिग्रस्त सड़क का हिस्सा पैदल पार करते हैं। दूसरी बस तियारा की तरफ से आती है और विद्यार्थियों को ले जाती है।
लोगों ने उठाई बस सेवा शुरू करने की मांग
लोगों की मांग है कि परिवहन निगम क्षतिग्रस्त डंगे के दोनों ओर बस सेवा शुरू कर दे। जिस तरह से स्कूल बसें विद्यार्थियों को ला और छोड़ रही हैं। तियारा से आने वाली बस दरवाह में आसानी से मुड़ जाएगी। सलोल की तरफ से आने वाली बस डंगे के पास मोड़ पर मुड़ सकती है। परिवहन निगम छोटी बसें लगाए तो मुड़ने में मुश्किल नहीं होगी। दूसरा सुझाव यह है कि वाया रैत-मच्छयाल-सलोल होकर कुछ बस रूट सुबह, शाम और दिन में लंज-नगरोटा सूरियां तक बहाल किए जाएं।



