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नागालैंड का लोंगवा गांव आधा भारत व आधा म्यांमार में फैला है, लोगों के पास दोनों देशों की नागरिकता

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नागालैंड के मोन ज़िले का लोंगवा गांव अपनी अनोखी स्थिति के कारण प्रसिद्ध है। यह गांव भारत और म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसा हुआ है, जहां सीमा रेखा गांव के बीच से गुजरती है।

मुख्य विशेषताएं

1. आधा भारत, आधा म्यांमार
गांव का आधा हिस्सा भारत में और आधा म्यांमार में आता है। गांव का मुखिया (अंग) का घर भी दोनों देशों में फैला हुआ है।

2. दोहरी नागरिकता
यहां रहने वाले लोगों के पास भारत और म्यांमार दोनों देशों की नागरिकता है। वे दोनों ओर स्वतंत्र रूप से आ-जा सकते हैं और दोनों देशों की सुविधाओं का लाभ उठाते हैं।

3. कोन्याक जनजाति
इस गांव में मुख्य रूप से कोन्याक जनजाति रहती है। यह जनजाति पहले “हेड हंटर” (सिर काटने की परंपरा) के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब यह परंपरा खत्म हो चुकी है।

4. जीवनशैली और संस्कृति
गांव के लोग कृषि और शिकार पर आधारित जीवन जीते हैं। कोन्याक लोग अपने चेहरे और शरीर पर टैटू बनवाने के लिए भी प्रसिद्ध हैं।

5. पर्यटन महत्व
लोंगवा गांव भारत और म्यांमार दोनों का अनुभव एक साथ देने के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां से म्यांमार के सुंदर पहाड़ी नज़ारे भी दिखाई देते हैं।

सांस्कृतिक और सामाजिक सेतु
लोंगवा गांव अपनी भौगोलिक स्थिति और दोहरी नागरिकता की वजह से अनोखा है। यह भारत और म्यांमार के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक सेतु का काम करता है।

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