रैत (कांगड़ा) : शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व के मंत्रियों और विधायकों से फरियाद कर हार चुके लंघाणा के लोगों की सड़क की कई दशक से लंबित मांग को आखिरकार स्थानीय विधायक और उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने पूरा कर दिया है। लंघाणा के रमेश गुलेरिया, नेक चंद गुलेरिया, सोहन सिंह गुलेरिया, सतपाल सिंह गुलेरिया, दया राम और बली मोहम्मद ने शुक्रवार को पठानिया से रैत में उनके घर पहुंचकर धन्यवाद किया। इस अवसर पर कैरी पंचायत के बलदेव सिंह चौहान व अन्य लोग भी उपस्थित थे। लोग बोले, लंघाणा व तरमूड़ा को सड़क से जोड़ने की मांग करते-करते उनके पूर्वज इस दुनिया से चले गए। उनके पूर्वज जीते-जी अपने गांव में वाहन नहीं देख पाए। गज खड्ड पर पुल या पैदल पुल की मांग करते-करते चले गए। अब यह मांग पूरी होने जा रही है तो उनके पूर्वज जिस भी लोक में होंगे, वे केवल सिंह पठानिया को अवश्य आशीर्वाद देंगे।
लोगों की सिर्फ यही एक मांग थी, पठानिया ने आश्वासन को पूरा कर लोगों का विश्वास जीता
लोगों ने बताया कि पठानिया के प्रयासों से ततवानी-लंघाणा-तरमूड़ा-मावा सड़क का काम सिरे चढ़ पाया है। जब 2022 में पठानिया विधायक बने थे तो इन गांवों के लोग पठानिया से मिले थे। लोगों ने पठानिया से एक ही मांग उठाई थी कि हमारे गांव को सड़क चाहिए। हमारी यही एक मांग है। पठानिया ने आश्वासन दिया था कि उनकी यह मांग अवश्य पूरी होगी। केवल सिंह पठानिया ने सबसे पहले इस सड़क को विधायक प्राथमिकता में डाला था। अब नाबार्ड में यह काम होने जा रहा है। इस तरह पठानिया ने अपने वादे पर खरा उतरते हुए लोगों का विश्वास जीत लिया।
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता से सड़क निर्माण की औपचारिकताओं पर चर्चा की
केवल सिंह पठानिया ने शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता विपुल सोनी से सड़क के एफसीए केस के संबंध में अपडेट लिया। आगे सड़क का काम किस तरह से शुरू करना है, इस पर भी चर्चा की। पठानिया ने आश्वासन दिया कि इस सड़क का काम जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
केवल पठानिया जब से विधायक बने हैं, लंघाणा-तरमूड़ा का अक्सर जिक्र करते रहे
लंघाणा के लोगों ने बताया कि उन्हें खुशी होती है कि केवल सिंह पठानिया 2022 में विधायक बने थे, तब से उन्होंने कई मंचों पर हमारी मांग को उठाया। जनसभा में चर्चा की। एक बार मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू शाहपुर आए थे, वहां भी उनकी मांग उठाई थी। इसके बाद ततवानी, मनेई, लंज आदि जगहों में जब भी पठानिया आते थे, वह लंघाणा की सड़क का जिक्र अवश्य करते। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि पठानिया उनके गांव को सड़क से अवश्य जोड़ेंगे। इससे पहले रहे मंत्रियों और विधायकों के मुंह से उन्होंने कभी अपने गांवों के नाम नहीं सुने, सड़क से जोड़ने की बात तो दूर।


