शिमला : अपने विधानसभा स्थित कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि इस बजट के मुख्यमंत्री के मुख्यमंत्री के तीन प्रिय शब्दों ‘फिस्कल प्रुडेंस, फिस्कल मैनेजमेंट, फिस्कल डिस्पीलीन और व्यवस्था परिवर्तन की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। सीएम सुक्खू ने गत वर्ष बजट पेश करने के पहले कहा था कि वह सबसे ज़्यादा पढ़ने वाले वित्त मंत्री हैं। उन्होंने इतिहास बना दिया। बजट अनुमान पूरी तरह से गलत साबित हुए, सब कुछ हवा हवाई है। बजट का मूल उद्देश्य ही यथार्थवादी अनुमान लगाना होता है। 70% अतिरिक्त खर्च बताता है कि सरकार को अपने ही आंकड़ों पर भरोसा नहीं था। यह साफ संकेत है कि सरकार अपनी ही वित्तीय योजना बनाने में विफल रही।
जयराम ठाकुर ने कहा कि इस बजट में न फिस्कल मैनेजमेंट है न फिस्कल डिस्पलीन और प्रूडेंस और न ही कोई व्यवस्था है। यहाँ सिर्फ और सिर्फ़ अव्यवस्था है।। इतना बड़ा अनुपूरक बजट यह बताता है कि खर्च पर कोई नियंत्रण नहीं है और सरकार बिना योजना के पैसे खर्च कर रही है। यह अनुपूरक बजट ही मुख्य बजट सरकार की आर्थिक नाकामी का प्रमाण पत्र है। गत वर्ष का कैपिटल एक्सपेंडिचर 3941 करोड़ जो पिछले बार से 37% कम है और कुल बजट का मात्र 3.98% है। इससे यह साफ़ है कि प्रदेश में विकास ठप है और सवाल यह उठता है 98 हज़ार 975 करोड़ रुपए आख़िर खर्च कहाँ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बार सप्लीमेंट्री बजट के डॉक्यूमेंट्स भी उपलब्ध नहीं करवाया। क्योंकि उन्हें अपनी इस नाकामी का एहसास हो चुका था।
प्रदेश में कांग्रेस सरकार के संरक्षण में फल-फूल रहा माफिया राज : जयराम
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन के भीतर और बाहर भारी गहमागहमी देखने को मिली, जहां मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अवैध वन कटान और खनन माफिया को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में माफिया राज पूरी तरह से हावी हो चुका है और सत्ता के संरक्षण में बेशकीमती वन संपदा को बेरहमी से लूटा जा रहा है।
जयराम ठाकुर ने विशेष रूप से सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां केवल 25 पेड़ काटने की अनुमति ली गई थी, लेकिन असलियत में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर 300 से अधिक हरे पेड़ों को जमींदोज कर दिया गया, जिसमें एक रसूखदार कांग्रेस नेता की सीधी संलिप्तता सामने आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र का जिक्र करते हुए भी सरकार को घेरा और कहा कि वहां भी कांग्रेस नेताओं के इशारे पर सैकड़ों पेड़ों का अवैध कटान किया गया और जब भाजपा विधायकों की जांच कमेटी ने मामले की तह तक जाने के लिए क्षेत्र का दौरा किया, तो साक्ष्यों को मिटाने के लिए उन कटे हुए पेड़ों को सतलुज नदी में फेंक दिया गया तथा कई पेड़ों को जेसीबी मशीनों के जरिए जमीन में दफन कर दिया गया, जो यह दर्शाता है कि माफिया को प्रशासन और सरकार का कोई डर नहीं रह गया है।
विपक्ष ने स्पष्ट किया कि निजी भूमि की आड़ में सरकारी और संरक्षित वनों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है और अवैध खनन की गतिविधियां भी चरम पर हैं, जिससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है बल्कि प्रदेश के राजस्व को भी करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि सरकार इन माफियाओं पर नकेल कसने में पूरी तरह विफल रही है और विपक्ष जनता के हितों तथा पर्यावरण की रक्षा के लिए इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक तब तक उठाता रहेगा जब तक दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो जाती।


