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हिमाचल सरकार का फैसला, चिट्टा तस्करी के आरोपी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे

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शिमला : हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशे (खासतौर पर “चिट्टा” यानी हेरोइन) के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने तय किया है कि चिट्टा/ड्रग्स के मामलों में आरोपी व्यक्ति अब पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यह प्रतिबंध उन लोगों पर लागू होगा, जिनके खिलाफ मामला दर्ज (FIR) है या जो जांच के दायरे में हैं

उद्देश्य क्या है
पंचायत स्तर पर स्वच्छ और अपराध-मुक्त नेतृत्व सुनिश्चित करना। युवाओं में बढ़ती नशे की समस्या पर रोक लगाना। गांव स्तर पर नशा माफिया के प्रभाव को कम करना।

इसका प्रभाव
पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि जांच सख्त होगी। राजनीतिक स्तर पर नशे से जुड़े लोगों की भागीदारी कम होगी। समाज में नशे के खिलाफ मजबूत संदेश जाएगा।

क्यों जरूरी था
हिमाचल में हाल के वर्षों में “चिट्टा” का नेटवर्क तेजी से फैला है, जिससे युवाओं पर बुरा असर पड़ा है। ऐसे में सरकार चाहती है कि ग्राम पंचायतों में साफ छवि वाले प्रतिनिधि ही चुने जाएं।

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