इस बात पर अकसर चर्चा होती है कि बड़ा खेल कौन सा है। भारत व आसपास के देशों में तो क्रिकेट का ही दबदबा है। लेकिन दुनिया की बात करें तो फुटबाल बड़ा या सबसे बड़ा खेल है। आजकल फुटबाल विश्व कप का आयोजन हो रहा है। अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में आधे से ज्यादा मैच हो चुके हैं। इसमें कुल 104 मैच से नया चैंपियन मिलेगा। अब तक सबसे अधिक बार ब्राजील पांच बार विश्व कप जीत चुका है। जर्मनी और इटली चार-चार बार और अर्जेंटीना तीन बार चैंपियन रहे हैं। फ्रांस और उरुग्वे दो-दो बार जीत चुके हैं। इंग्लैंड व स्पेन ने एक-एक बार खिताब जीता है। इस बार सबसे अधिक ध्यान खींचा द्वीपीय देश केप वर्डे ने। अफ्रीका महाद्वीप के लगभग पांच लाख की आबादी वाले इस देश ने गत चैंपियन अर्जेंटीना को नाकआउट में 3-2 से जीतने में पसीना निकाल दिया। इतनी ज्यादा आबादी से तो हमारे यहां कई जिले हैं।
टीमों की बात करें तो इस बार 12 ग्रुपों में 48 देश खेले। इनमें सबसे ज्यादा यूरोप की 16 टीमें रहीं। अफ्रीका की 10 और एशिया से नौ टीमें थीं। दक्षिण अमेरिका से छह टीमें उतरीं। रोचक यह है कि आस्ट्रेलिया भी एशिया के खाते से शामिल हुआ। चार बार का चैंपियन इटली क्वालीफाई नहीं कर पाया। पहले दौर से 16 टीमें बाहर हो गईं। इनमें दो-दो सभी ग्रुपों में टाप पर रहने वाली टीमें थीं। इसके अतिरिक्त आठ अन्य टीमें भी नाकआउट में पहुंचीं, जिनका प्रदर्शन अच्छा था। एशियाई देशों का प्रदर्शन पहले दौर में ही खराब रहा और सिर्फ आस्ट्रेलिया और जापान को ही अगले दौर में खेलने का मौका मिला। एशिया से ईरान, इराक, जार्डन, कतर और सऊदी अरब जैसे युद्ध प्रभावित क्षेत्र के देश भी विश्व कप में खेले। दुनिया में 76वीं रैंकिंग वाला इजरायल विश्व कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया था। इजरायल भौगोलिक रूप से तो एशियाई देश है, लेकिन यह टीम यूरोपीय फुटबाल महासंघ के तहत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खेलती है। नाकआउट में सबसे ज्यादा यूरोप से 13 और अफ्रीका से नौ टीमें पहुंचीं।
अब तक हुए फुटबाल विश्व कप में यूरोप और दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप की टीमें ही चैंपियन रही हैं। इस बार देखना यह होगा कि क्या खिताब इन महाद्वीपों में ही रहता है या तीसरे महाद्वीप का नाम दर्ज हो जाता है।



