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संस्थान बंद करने और चल रहे संस्थानों के नाम बदलने में माहिर है कांग्रेस सरकार : जयराम ठाकुर

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शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि साढ़े तीन साल से ज्यादा के कार्यकाल में बताने के लिए सुक्खू सरकार के पास अपनी कोई उपलब्धि नहीं है। इसीलिए वह गांधी परिवार की चापलूसी करने हेतु हिमाचल में पहले से चल रहे संस्थानों के नाम गांधी-नेहरू परिवार के नाम पर रख रही है। इसी तरीके से अपने नाम और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के नाम से भी सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने कुछ योजनाएं शुरू कीं, लेकिन वह प्रदेशवासियों के साथ किसी छलावे से कम नहीं थीं। इन योजनाओं से ज्यादा धनराशि उनके प्रचार-प्रसार पर खर्च की गई। लोग फॉर्म भर कर प्यारी बहना सुख समृद्धि योजना के पैसे का इंतजार कर रहे हैं और सुख की सरकार आए दिन पात्रता शर्ते बदल कर उन्हें गुमराह कर रही है। साढ़े तीन साल से ज्यादा के कार्यकाल में सरकार के पास उपलब्धियों के नाम पर ढाई हजार से ज्यादा संस्थान बंद करने, पूर्व सरकार की योजनाओं का बजट रोकने, डेढ़ लाख से ज्यादा पद समाप्त करने, 10,000 से ज्यादा लोगों को नौकरी से निकालने, किसान, बागवानों और महिलाओं को ठगने, देश-विदेश में घूम-घूमकर झूठ बोलने के अलावा कुछ भी नहीं है। पक्की नौकरी सरकार दे नहीं रही है और कच्ची नौकरी के सारे रास्ते बंद कर रही है। इसीलिए हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले से चल रहे संस्थानों के नाम गांधी परिवार के नाम पर रखकर आलाकमान के सामने अपना पक्ष मजबूत करना चाहते हैं।

जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस को गांधी परिवार के अलावा कुछ और नजर नहीं आता है। पूर्व की भाजपा सरकार के समय हमने मंडी में सरदार पटेल के नाम से विश्वविद्यालय खोला था, जो प्रदेश का दूसरा अकादमिक विश्वविद्यालय था। इससे न सिर्फ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का भार कम होता, बल्कि प्रदेश की बड़ी आबादी को घर के नजदीक शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिलता और छात्रों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम होता। लेकिन सत्ता संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री उसके पीछे पड़ गए और लगातार सरदार पटेल विश्वविद्यालय को समाप्त करने की कोशिश करते रहे। आज भी उनकी कोशिशें जारी हैं, क्योंकि यह विश्वविद्यालय हमने खोला था और भारत की एकता और अखंडता के अग्रदूत लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर खोला था। इसी तरह मुख्यमंत्री ने चुन-चुनकर पूर्व सरकार द्वारा जनता की मांग और बजट के प्रावधान के साथ खोले गए जनहित के संस्थान बिना किसी कारण, सिर्फ राजनीतिक विद्वेष के कारण बंद कर दिए। पूर्व सरकार की योजनाएं ठप कर दीं।

जयराम ठाकुर ने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री गांधी परिवार के गुणगान में व्यस्त हैं और दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश को हर प्रकार से सहयोग करने वाली मोदी सरकार को कोसते रहते हैं। केंद्र सरकार के सहयोग का आभार जताना तो दूर, उसका नाम लेने से भी कतराते हैं। केंद्र सरकार के आर्थिक सहयोग से चल रही योजनाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का गलती से भी नाम न आ जाए, इसमें भी पूरी सतर्कता बरतते हैं। हिमाचल प्रदेश में 320 मेडिकल पीजी की सीटें बढ़ाई गईं, इसका गुणगान तो मुख्यमंत्री हर जगह कर रहे हैं, लेकिन वह यह नहीं बता रहे हैं कि प्रति सीट केंद्र सरकार डेढ़ करोड़ रुपये, यानी 480 करोड़ रुपये दे रही है। स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन वह एक बार भी नहीं बताते कि जिस जीका परियोजना के तहत यह कार्य हो रहे हैं, उसके कुल ऋण का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा ही चुकाया जाता है। आज हिमाचल प्रदेश को केंद्र प्रायोजित योजनाओं में 90 प्रतिशत का सहयोग केंद्र सरकार द्वारा मिल रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सुनिश्चित किया गया है। इसके बाद भी सुक्खू सरकार द्वारा दिन-रात केंद्र सरकार की आलोचना करना हैरान करने वाला है।

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Author: speedpostnews

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