शिमला : राजधानी शिमला में चल रहे ऐतिहासिक ‘शिमला क्रिकेट कार्निवल’ ने आज एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक क्षण का गवाह बना। कार्निवल के मुख्य उद्देश्य और **”नशा छोड़ो, खेल खेलो”** के नारे को यथार्थ में बदलते हुए, आज के मुकाबले में ‘सनराइज़ रीबर्थ रिहैबिलिटेशन सेंटर’ की टीम ने हिस्सा लिया और समाज के सामने वापसी व जीवटता की एक बेहतरीन मिसाल पेश की।
नशे और ‘चिट्टे’ के खिलाफ कार्निवल की ऐतिहासिक मुहिम
शिमला क्रिकेट कार्निवल का इतिहास केवल हार-जीत या क्रिकेट के मुकाबलों तक सीमित नहीं है। यह आयोजन पिछले कई वर्षों से हिमाचल प्रदेश में फैल रहे नशे और विशेषकर ‘चिट्टे’ के जानलेवा प्रकोप के खिलाफ एक सशक्त सामाजिक आंदोलन रहा है। इस कार्निवल की नींव ही युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोड़ने और उन्हें नशे के दलदल से दूर रखने के लिए रखी गई थी। अपने पिछले संस्करणों की तरह, इस बार भी यह टूर्नामेंट नशे के खिलाफ एक युद्ध स्तर की मुहिम चला रहा है, जिसका असर आज मैदान पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला।
प्रेरणा का स्रोत: कप्तान आशीष और उनकी टीम
आज का बहुचर्चित मुकाबला ‘सनराइज़ रीबर्थ’ और ‘ओल्ड टाउन बस स्टैंड’ की टीमों के बीच खेला गया। ‘सनराइज़ रीबर्थ’ टीम का नेतृत्व कर रहे कप्तान आशीष की कहानी आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। आशीष, जो स्वयं कभी नशे की गहरी गिरफ़्त में थे, आज पिछले 12 सालों से नशे से पूरी तरह मुक्त हैं। वे अब खुद ‘सनराइज़ रीबर्थ’ नाम से एक नशामुक्ति केंद्र संचालित कर रहे हैं और अब तक कई युवाओं को नशे के भयानक चंगुल से बाहर निकालकर उन्हें नया जीवन दे चुके हैं। मैदान पर बल्ले और गेंद के साथ उनका और उनकी टीम का प्रदर्शन यह साबित करता है कि इच्छाशक्ति के दम पर नशे को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
मुख्य धारा में युवाओं की वापसी का प्रयास
इस पूरे आयोजन के पीछे ‘हिमालयन स्पोर्ट्स एंड कल्चरल यूथ सोसायटी, शिमला’ के साथ-साथ ब्लैक ब्लैंकेट एनजीओ का महत्वपूर्ण योगदान है। सोसायटी लगातार यह प्रयास कर रही है कि जो युवा नशे की लत का शिकार हो गए थे और अब रिहैब के माध्यम से सुधार की राह पर हैं, उन्हें समाज की मुख्य धारा में दोबारा कैसे शामिल किया जाए। सोसायटी का स्पष्ट संदेश है कि नशे से लड़ रहे युवाओं को समाज के तिरस्कार की नहीं, बल्कि साथ और समर्थन की आवश्यकता है। क्रिकेट के इस महाकुंभ के जरिए सोसायटी न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच दे रही है, बल्कि ‘चिट्टे’ मुक्त और स्वस्थ शिमला के निर्माण का अपना सपना भी साकार कर रही है।



