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शांति के नाम पर युद्ध का व्यापार

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–अवनीश कुमार गुप्ता ‘निर्द्वंद’

तेल की हर बूंद में, दुनिया का खेल छुपा है,
शांति के नाम पर हर मोड़ पर धुआँ खड़ा है।

हॉर्मुज़ की गलियों में, रास्ते भी सहमे हैं,
जहाज़ों के दिल में अब, डर के किस्से गढ़े हैं।

इज़रायल बोले-सुरक्षा, ईरान कहे-जवाब,
दोनों के शब्दों में छुपा, ताकत का ही ख्वाब।

अमेरिका दूर खड़ा, नियमों की बात करता,
पर हर संकट में खुद ही, खेल नया रचता।

गैस के कारखानों में, आग का नाच चलता है,
ऊर्जा की इस राजनीति में, सच कहीं जलता है।

बाजार के चेहरे पर, चिंता की रेखा गहरी,
हर बढ़ती कीमत जैसे, आम ज़िंदगी पे पहरी।

भारत भी चुपचाप, संतुलन साधे बैठा है,
सस्ते तेल के संग ही, सिद्धांतों को तौला है।

रूसी सौदों में अब, नैतिकता हल्की लगती,
सैंक्शन की दुनिया में, दोस्ती भी बदलती।

टीवी पर युद्ध चमके, बहसों में शोर बड़ा,
रसोई में महँगाई का, असली सच खड़ा।

जनता के हिस्से में बस, चिंता और सवाल,
नेताओं के हिस्से में, भाषण और कमाल।

हर मिसाइल के पीछे, कोई सौदा पलता है,
हर शांति के पीछे भी, लाभ कहीं चलता है।

मिट्टी सब याद रखे, तेल का हर व्यवहार,
एक दिन हिसाब होगा-कौन सही, कौन गुनहगार।

(कवि साहित्यकार एवं स्वतंत्र स्तंभकार हैं)

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