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राजस्थान के श्री करणी मंदिर में चूहों की पूजा, चूहा पैर के नीचे आकर मर जाए तो चांदी का चूहा चढ़ाना पड़ेगा

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श्री करणी माता मंदिर (जिसे “चूहों का मंदिर” भी कहा जाता है) राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक कस्बे में स्थित है। यहाँ पर हजारों की संख्या में चूहे रहते हैं और इन्हें श्रद्धालु “काबा” कहकर पूजते हैं। इनके पूजने के पीछे धार्मिक मान्यता और कथा जुड़ी हुई है।

कारण और मान्यता

1. करणी माता की शक्ति से जुड़ी कथा
मान्यता है कि करणी माता माँ दुर्गा का अवतार थीं। एक बार उनके परिवार के एक बालक की मृत्यु हो गई। करणी माता ने यमराज से प्रार्थना की कि उस बालक को जीवित कर दिया जाए। यमराज ने कहा कि यह संभव नहीं है, लेकिन भविष्य में करणी माता के वंशज मरने के बाद इंसान के रूप में जन्म नहीं लेंगे, बल्कि चूहों के रूप में ही पुनर्जन्म लेंगे और फिर मनुष्य के रूप में जन्म पाएंगे। तभी से यहाँ चूहों को करणी माता के वंशज मानकर पूजने की परंपरा है।

2. चूहों की विशेष मान्यता
यहाँ लगभग 25,000 से अधिक चूहे रहते हैं और मंदिर के प्रसाद को चूहे पहले ग्रहण करते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि चूहों द्वारा खाया हुआ प्रसाद “पवित्र प्रसाद” है।

3. सफेद चूहों का महत्व
मंदिर में कभी-कभी सफेद चूहे भी दिखाई देते हैं, जिन्हें करणी माता और उनके पुत्रों का स्वरूप माना जाता है। इन्हें देखना शुभ और सौभाग्यशाली माना जाता है।

4. चूहों को नुकसान नहीं पहुँचाना
यहाँ चूहों को मारना या नुकसान पहुँचाना सख्त वर्जित है। यदि गलती से किसी श्रद्धालु के पैर से चूहा कुचल भी जाए तो उसे चाँदी का चूहा चढ़ाना पड़ता है।

इसलिए, करणी माता मंदिर में चूहों की पूजा सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं बल्कि पुनर्जन्म और देवी शक्ति से जुड़ी मान्यता पर आधारित है।

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