जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों में “फूड शेयरिंग” (Food Sharing) या “फेयरटाइलर” (Fairteiler) जैसी पहलें चलती हैं।
इनमें लोग, रेस्तराँ और सुपरमार्केट अपने बचे हुए खाने या खाने के पैकेट सार्वजनिक जगहों पर रख देते हैं—जैसे बाड़ों, फ्रिजों या विशेष बॉक्सों में—ताकि ज़रूरतमंद लोग मुफ्त में ले सकें।
मुख्य बातें
इसे “फूड शेयरिंग” मूवमेंट कहा जाता है।
खाना खराब होने से पहले बाँट दिया जाता है ताकि कोई भूखा न सोए और बर्बादी भी कम हो।
कई जगहों पर बाड़ों, सार्वजनिक फ्रिज (Community Fridges) और फूड कपबोर्ड लगाए जाते हैं।
यह व्यवस्था पूरी तरह स्वैच्छिक (volunteer-based) और विश्वास पर आधारित होती है।
इससे दो फायदे होते हैं
1. गरीब या जरूरतमंद को खाना मिल जाता है।
2. खाने की बर्बादी (food waste) कम होती है।
जर्मनी में “Foodsharing.de” नाम की वेबसाइट और नेटवर्क भी है, जो लोगों को जोड़ती है ताकि कोई भी भूखा न रहे।



