शिमला : हिमाचल प्रदेश के वन क्षेत्र और ग्रामीण आर्थिकी को नई दिशा देने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की गई है। विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेश के माननीय मुख्य सचिव, कमलेश कुमार पंत ने काउंटिंग ग्रीन वेल्थ: टुवर्ड्स ए फ्यूचर-रेडी पीपल्स फॉरेस्ट इकॉनमी इन हिमाचल प्रदेश नामक ऐतिहासिक रिपोर्ट का आधिकारिक विमोचन किया।
यह रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश वन विभाग, प्रदेश सरकार और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी के बीच पहला संयुक्त और दूरदर्शी प्रयास है। इस विमोचन कार्यक्रम के दौरान बीआईपीपी-आईएसबी के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर अश्विनी छत्रे, स्टेट कोआर्डिनेटर (हिमाचल प्रदेश) नेहा चक्रवर्ती, कोआर्डिनेटर कम्यूनिटी एनगेजमैंट विजय गुलेरिया, आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव डॉ. पुष्पेंद्र राणा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
देश में पहली बार एआई तकनीक का उपयोग
यह रिपोर्ट केवल सामान्य वन क्षेत्र के आकलन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में पहली बार किसी राज्य ने जमीनी स्तर पर वन संपदा और कार्बन स्टॉक का सटीक, प्रजाति-वार वैज्ञानिक मानचित्रण करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) व मशीन लर्निंग का बड़े पैमाने पर उपयोग किया है। यह अनूठी पहल देश के हरित शासन के लिए एक नया राष्ट्रीय मानक स्थापित करती है, जो हिमाचल को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और ग्रामीण समुदायों के आर्थिक विकास को मजबूत करने में सक्षम बनाएगी।
जल सुरक्षा, बागवानी और आर्थिकी को मिलेगा संबल
इस अवसर पर यह रेखांकित किया गया कि वनों का स्वास्थ्य सीधे तौर पर हमारी जल सुरक्षा, जलवायु लचीलापन, कृषि-बागवानी उत्पादकता और ग्रामीण आजीविका से जुड़ा हुआ है। इस व्यापक वन संसाधन सूची और कार्बन स्टॉक मूल्यांकन से प्राप्त निष्कर्ष और डेटा न केवल नीति निर्माण में मील का पत्थर साबित होंगे, बल्कि विभिन्न सरकारी विभागों के बीच आपसी समन्वय और लक्षित जमीनी हस्तक्षेपों को डिजाइन करने के लिए एक बेहद उपयोगी नीतिगत ढांचे के रूप में कार्य करेंगे। यह रिपोर्ट राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के नेतृत्व में पर्यावरण अनुकूल आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।


