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मुख्यमंत्री सुक्खू के बड़े-बड़े दावों के बावजूद हर दिन खुल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल : जयराम ठाकुर
मुख्यमंत्री सुक्खू के बड़े-बड़े दावों के बावजूद हर दिन खुल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल : जयराम ठाकुर
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शिमला : हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश के बड़े-बड़े दावों के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल हर दिन खुल रही है। एक तरह मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हम बहुत बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं राज्य में देने के प्रयत्न कर रहे हैं जबकि जमीनी हकीकत इससे बहुत अलग है। सरकार के दावों के विपरीत राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली हररोज उजागर हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला से जारी प्रेस बयान में आरोप लगाते हुए कहा है कि आये दिन इन दावों की पोल खुल रही है, जनता सड़कों पर है और लोग आंदोलनरत हैं लेकिन सरकार व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। शिमला के आईजीएमसी और चमियाना के हालात तो रोज सुर्खियों में हैं ही लेकिन राज्य के हर कोने से रोज़ हमारे पास भी फीडबैक आ रहा है कि हालात बिगड़े हुए हैं।
मंडी के नेरचौक मेडिकल कॉलेज की निरंतर अनदेखी करके इस सरकार ने उसका स्तर ही गिरा कर रख दिया है और आलम ये है कि चार साल में एक बार भी स्वास्थ्य मंत्री यहां निरीक्षण करने नहीं पहुंचे। मुख्यमंत्री यहां चार साल से एमआरआई मशीन लगाने के दावे कर रहे हैं लेकिन आज तक वो स्थापित नहीं हुई। रोगी कल्याण समिति की इन चार वर्षों में एक भी बैठक तक नहीं हुई।
उधर कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था का आलम यह है कि चंबा के दो गंभीर रूप से बीमार बच्चों को ऑपरेशन के लिए पूरे एक साल बाद की तारीख दी जा रही है, जो यह स्पष्ट दर्शाता है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार जनता को किस स्तर की सुविधाएं दे रही है। पूर्व में भाजपा सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई जनहितकारी ‘हिम केयर’ योजना को महज राजनीतिक विद्वेष के चलते लगभग बंद कर दिया गया है और इसे बदनाम करके गरीब जनता को मिलने वाली मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में सभी प्रकार की लैब जांचों के दाम बढ़ा दिए गए हैं, जिससे मजबूर होकर आम जनता को महंगे दामों पर प्राइवेट लैब में जाकर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं और प्रदेश के हर कोने में लोग बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं से बेहद परेशान व त्रस्त हैं।
जयराम ठाकुर ने कुल्लू अस्पताल में बालीचौकी निवासी रजनी शर्मा उर्फ मंजू की प्रसव के दौरान हुई दर्दनाक मृत्यु और परिजनों से हुए दुर्व्यवहार के मामले में न्याय की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रति स्थानीय विधायक सुंदर ठाकुर की उस टिप्पणी को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है, जिसमें उन्होंने इस जन-आंदोलन को भाजपा का एजेंडा करार दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़िता के परिजनों द्वारा इलाज में सरासर लापरवाही के आरोप लगाए जाने पर स्थानीय स्तर पर आक्रोश व्याप्त हुआ, जिसके बाद मैंने भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवार, प्रदर्शनकारियों, अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच व सख्त कार्रवाई की मांग की थी, परंतु स्थानीय विधायक मामले को राजनीतिक तूल देकर जनता की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं और निष्पक्ष जांच के बजाय मामले की लीपापोती के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने हैरानी जताई कि न्याय की गुहार लगा रहे युवाओं के अनशन को छह दिन बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार और प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया और न ही अनशन समाप्त कराने का कोई संवेदनशील प्रयास किया, बल्कि विधायक द्वारा आहत करने वाली बयानबाजी से माहौल को और अधिक खराब किया गया, जिसके लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलनरत युवा किसी राजनीतिक दल से संबंध न रखकर गैर-राजनीतिक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि हैं जिनकी न्यायोचित मांगों को सरकार द्वारा तत्काल सुना जाना चाहिए। परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए तथा पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहने का भरोसा देते हुए उन्होंने अनशन पर बैठे युवाओं से स्वास्थ्य के हित में अपना अनशन समाप्त कर कानूनी मार्ग से लड़ाई लड़ने की विनम्र अपील की है। साथ ही राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह तुरंत प्रभाव से व्यवस्था सुधारे ताकि भविष्य में किसी भी परिवार के साथ ऐसी दुखद और संवेदनशील घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
मुख्यमंत्री सुक्खू के बड़े-बड़े दावों के बावजूद हर दिन खुल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल : जयराम ठाकुर
शिमला : हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश के बड़े-बड़े दावों के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल हर दिन खुल रही है। एक तरह मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हम बहुत बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं राज्य में देने के प्रयत्न कर रहे हैं जबकि जमीनी हकीकत इससे बहुत अलग है। सरकार के दावों के विपरीत राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली हररोज उजागर हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला से जारी प्रेस बयान में आरोप लगाते हुए कहा है कि आये दिन इन दावों की पोल खुल रही है, जनता सड़कों पर है और लोग आंदोलनरत हैं लेकिन सरकार व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। शिमला के आईजीएमसी और चमियाना के हालात तो रोज सुर्खियों में हैं ही लेकिन राज्य के हर कोने से रोज़ हमारे पास भी फीडबैक आ रहा है कि हालात बिगड़े हुए हैं।
मंडी के नेरचौक मेडिकल कॉलेज की निरंतर अनदेखी करके इस सरकार ने उसका स्तर ही गिरा कर रख दिया है और आलम ये है कि चार साल में एक बार भी स्वास्थ्य मंत्री यहां निरीक्षण करने नहीं पहुंचे। मुख्यमंत्री यहां चार साल से एमआरआई मशीन लगाने के दावे कर रहे हैं लेकिन आज तक वो स्थापित नहीं हुई। रोगी कल्याण समिति की इन चार वर्षों में एक भी बैठक तक नहीं हुई।
उधर कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था का आलम यह है कि चंबा के दो गंभीर रूप से बीमार बच्चों को ऑपरेशन के लिए पूरे एक साल बाद की तारीख दी जा रही है, जो यह स्पष्ट दर्शाता है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार जनता को किस स्तर की सुविधाएं दे रही है। पूर्व में भाजपा सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई जनहितकारी ‘हिम केयर’ योजना को महज राजनीतिक विद्वेष के चलते लगभग बंद कर दिया गया है और इसे बदनाम करके गरीब जनता को मिलने वाली मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में सभी प्रकार की लैब जांचों के दाम बढ़ा दिए गए हैं, जिससे मजबूर होकर आम जनता को महंगे दामों पर प्राइवेट लैब में जाकर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं और प्रदेश के हर कोने में लोग बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं से बेहद परेशान व त्रस्त हैं।
जयराम ठाकुर ने कुल्लू अस्पताल में बालीचौकी निवासी रजनी शर्मा उर्फ मंजू की प्रसव के दौरान हुई दर्दनाक मृत्यु और परिजनों से हुए दुर्व्यवहार के मामले में न्याय की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रति स्थानीय विधायक सुंदर ठाकुर की उस टिप्पणी को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है, जिसमें उन्होंने इस जन-आंदोलन को भाजपा का एजेंडा करार दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़िता के परिजनों द्वारा इलाज में सरासर लापरवाही के आरोप लगाए जाने पर स्थानीय स्तर पर आक्रोश व्याप्त हुआ, जिसके बाद मैंने भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवार, प्रदर्शनकारियों, अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच व सख्त कार्रवाई की मांग की थी, परंतु स्थानीय विधायक मामले को राजनीतिक तूल देकर जनता की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं और निष्पक्ष जांच के बजाय मामले की लीपापोती के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
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