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मिट्टी सब याद रखती है!

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अवनीश कुमार गुप्ता ‘निर्द्वंद’

मिट्टी सब याद रखती है, हर कदम का हिसाब रखती है,
पसीने की हर बूंद को, अपने आँचल में सहेजती है,
खामोशी में भी सुनती है, हर आह और हर पुकार,
धरती माँ की गोद में, छुपा है सच अपार।

जिसने धरती को सींचा, अन्न से देश को भर डाला,
वही आज हक की खातिर, लंबी कतारों में संभाला,
जिसके श्रम से जीवन चला, वही बेबस खड़ा है आज,
न्याय की राह में अटका, उसका हर एक साज।

मेहनत खेतों में जलती, धूप में सपने बोती है,
पर फैसला दफ्तरों में, फाइलों में ही सोती है,
हल की हर एक रेखा में, उम्मीदों का गीत लिखा,
कागज़ के इस जंगल ने, हर उत्तर को रोक रखा।

किसान दया नहीं माँगे, बस सम्मान की बात करे,
अपने श्रम का सही मूल्य, और न्याय की आस धरे,
झुककर जो धरती जोते, वो सिर ऊँचा कर खड़ा रहे,
उसके अधिकार की खातिर, हर इंसान साथ खड़ा रहे।

अन्नदाता मजबूत होगा, तभी देश मजबूत होगा,
उसकी मेहनत से ही हर घर का दीपक रोशन होगा,
यदि वो ही कमजोर पड़ा, तो भविष्य भी डगमगाएगा,
भारत का हर सपना फिर, अधूरा रह जाएगा।

मिट्टी का हिसाब एक दिन, हर हाल में सामने आएगा,
जो बोया है समय ने, वही फल लौटकर जाएगा,
सत्य की इस धरती पर, न्याय जरूर उतर आएगा,
किसान के हर आँसू का, उत्तर जग को मिल जाएगा।
(कवि साहित्यकार एवं स्वतंत्र स्तंभकार हैं)

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Author: speedpostnews

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