शिमला : हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मादक पदार्थों की तस्करी में युवाओं पर इसके दुष्प्रभाव को ध्यान में रखने की जरूरत बताई है। न्यायाधीश विरेंदर सिंह ने चरस तस्करी के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एनडीपीएस एक्ट विशेष कानून है। समाज में विशेष रूप से युवा पीढ़ी पर मादक पदार्थों के प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए कोर्ट का मानना है कि आवेदक बीएनएसएस की धारा 482 के तहत किसी भी राहत का हकदार नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि पुलिस को आवेदक को गिरफ्तार न करने का कोई निर्देश जारी किया जाता है तो इससे समाज में गलत संकेत जाएगा। पुलिस के अनुसार 4 मार्च, 2025 को मामले के जांच अधिकारी अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ आबकारी एवं मादक पदार्थों से संबंधित अपराध का पता लगाने के लिए गश्त पर थे। रात को 10 बजकर 50 मिनट पर जब पुलिस पार्टी शिमला के सुन्नी पुलिस स्टेशन के तहत ‘हरि बावरी’ नामक स्थान पर मौजूद थी, तभी आई.ओ. को गुप्त सूचना मिली कि नीरज (आवेदक) लूहरी की तरफ से आ रहा है और उसके पास बड़ी मात्रा में चरस है। गुप्त सूचना के अनुसार वह उसी की सप्लाई करने तत्तापानी आ रहा था। रात्रि करीब 11 बजकर 10 मिनट पर लूहरी चाबा की तरफ से पिकअप को चालक द्वारा चलाते हुए देखा गया। सर्च लाइट की मदद से उक्त वाहन के चालक को रुकने का निर्देश दिया गया, जिस पर वाहन को रोका गया तो उसमें एक व्यक्ति बैठा हुआ पाया गया। पूछताछ करने पर चालक ने अपना नाम नीरज (आवेदक) बताया। चूंकि घटनास्थल पर सड़क संकरी थी, इसलिए आवेदक ने यह कहकर कि वह वाहन को सड़क के किनारे पार्क करेगा, उसे तेज गति से लगभग 100 मीटर तक पीछे घुमाया। इसके बाद, वाहन को सड़क के किनारे पार्क करने के बाद, उसने वाहन से एक सफेद रंग का पैकेट सड़क के निचले हिस्से की ओर फेंक दिया और मौके से भाग गया। इसके बाद पुलिस पार्टी ने उक्त वाहन को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन आवेदक ने वाहन को तेज गति से चलाया था, इसलिए पुलिस यह पता नहीं लगा सकी कि वह बसंतपुर की तरफ गया था या सुन्नी की तरफ। इसके बाद उसे पकड़ने के लिए तलाशी ली गई। जब उसके द्वारा फेंके गए पैकेट को खोला तो उसमें चरस मिली। इसका वजन 477 ग्राम पाया गया।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने कथित तौर पर 477 ग्राम चरस वाले पैकेट को फेंक दिया और उसके बाद अपने वाहन को चलाते हुए मौके से भाग गया। पुलिस का कहना था कि आवेदक मामले की जांच में शामिल नहीं हो रहा है। वह चरस कहां से लाया था और कहां बेचने जा रहा था, इस बारे में जांच अभी तक नहीं की गई है। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन करने पर पाया कि प्राथमिकी में आरोपी का नाम और पता स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने इन सभी तथ्यों पर विचार करते ह कहा कि जमानत के मुद्दे पर निर्णय लेते समय व्यक्ति और समाज के व्यापक हित के बीच एक प्रतिनिधि संतुलन पर विचार किया जाना चाहिए। यदि पुलिस को आवेदक को गिरफ्तार न करने का कोई निर्देश जारी किया जाता है तो इससे समाज में गलत संकेत जाएगा। इतना ही नहीं, यदि पुलिस/जांच अधिकारी पर कोई प्रतिबंध लगाया जाता है तो इससे अन्य व्यक्तियों को इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहन/प्रलोभन मिलेगा। उन्हें लगेगा कि 477 ग्राम चरस रखने के आरोप में नामित व्यक्ति अभी भी समाज में खुलेआम घूम रहा है।
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मादक पदार्थों की तस्करी से युवा पीढ़ी पर पड़ रहे दुष्प्रभाव से हाई कोर्ट चिंतित, 477 ग्राम चरस रखने के आरोपी को जमानत नहीं
मादक पदार्थों की तस्करी से युवा पीढ़ी पर पड़ रहे दुष्प्रभाव से हाई कोर्ट चिंतित, 477 ग्राम चरस रखने के आरोपी को जमानत नहीं
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