शिमला : हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्रीय बजट को ‘विकसित भारत’ के संकल्प की सिद्धि और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सबसे मजबूत आधार स्तंभ बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजनरी नेतृत्व की सराहना करते हुए ठाकुर ने कहा कि आज देश का आर्थिक ढांचा पूरी तरह से परिवर्तित हो चुका है और भारत अब पुरानी ‘सब्सिडी-आधारित’ अर्थव्यवस्था के दौर को पीछे छोड़कर ‘निवेश-आधारित’ विकास के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से सिद्ध किया कि पिछले एक दशक में भारत ने विकास की वह ऊंचाइयां छुई हैं जिनकी पहले कल्पना करना भी असंभव था, जिसका सबसे ठोस प्रमाण देश के कुल पूंजीगत व्यय (CAPEX) में हुई 516 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि है। जयराम ठाकुर ने तुलनात्मक व्याख्या करते हुए बताया कि जहाँ वर्ष 2013-14 में यह व्यय मात्र 1.98 लाख करोड़ रुपये था, वहीं आगामी वित्त वर्ष तक यह 12.2 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है, जो सीधे तौर पर देश की रक्षा, कृषि, शिक्षा और बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने में निवेश किया जा रहा है। उन्होंने विस्तार से जानकारी दी कि रक्षा बजट में 287 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि कृषि मंत्रालय का बजट 27 हजार करोड़ से बढ़कर 1.32 लाख करोड़ और रेलवे का पूंजीगत व्यय 63 हजार करोड़ से बढ़कर 2.93 लाख करोड़ रुपये हो चुका है, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भी तीन गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में कांग्रेस सरकार द्वारा फैलाए जा रहे ‘अनदेखी’ के भ्रम को पूरी तरह नकारते हुए जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार राज्य को रेल, सड़क और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे के लिए रिकॉर्ड वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए कर हस्तांतरण के रूप में 13,949 करोड़ रुपये और अनुदान सहायता के तहत 10,243 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है, इसके अतिरिक्त राज्य को 8,309 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण भी दिया गया है जो केंद्र की हिमाचल के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र की 90:10 फंडिंग वाली करीब 200 योजनाएं ही वर्तमान में हिमाचल के विकास की असली रीढ़ हैं, जिनमें अटल टनल, एम्स बिलासपुर और उड़ान योजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।
दूसरी ओर, ठाकुर ने राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के ‘विलाप’ को आंकड़ों के साथ घेरा और बताया कि जहाँ मनमोहन सिंह की सरकार के 10 वर्षों में हिमाचल को मात्र ₹18,091 करोड़ की RDG मिली थी, वहीं मोदी सरकार ने इसे चार गुना से भी अधिक बढ़ाकर ₹77,823 करोड़ तक पहुँचाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सुक्खू सरकार 16वें वित्त आयोग के सामने राज्य का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में विफल रही है और अब अपनी प्रशासनिक कमियों को छिपाने के लिए केंद्र पर दोषारोपण कर रही है, जबकि कर्नाटक जैसी कांग्रेस शासित सरकारों ने ही स्वयं आरडीजी का विरोध किया था।
वर्तमान राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने सुक्खू सरकार को दिशाहीन और वित्तीय रूप से दिवालिया करार दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि वे किस आधार पर 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने का दावा करते हैं, जबकि हकीकत में राज्य की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तहस-नहस हो चुकी है और स्थिति यह है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन और पेंशन देना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने के लिए जो ‘झूठी गारंटियां’ दी थीं, वे अब उनके गले की फांस बन गई हैं और मुख्यमंत्री को जोश में आकर किए गए उन वादों के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने विधायक निधि बंद करने और पंचायत चुनावों के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले को ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘हार का डर’ बताया। अंत में, कर्ज के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ पूर्व भाजपा सरकार ने 5 साल में केवल 19,600 करोड़ का कर्ज लिया था, वहीं वर्तमान सरकार ने पिछले तीन सालों में ही प्रदेश को कर्ज के गहरे दलदल में डुबो दिया है। ठाकुर ने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि वे चाटुकार सलाहकारों के बजाय अपने कैबिनेट मंत्रियों की सुनें और यदि वे सरकार चलाने में सक्षम नहीं हैं, तो जनता के सम्मान में इस्तीफा दे दें, क्योंकि भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के कारण आज पूरा प्रदेश “रेंग” रहा है।



