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जनहित के भवनों पर ठेकेदार की तालाबंदी नाकामी, मुख्यमंत्री के झूठ का हो रहा पर्दाफाश : जयराम ठाकुर

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शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार तालाबंदी के बाद अब ठेकेदार भी भुगतान न मिलने पर तालाबंदी कर रहे हैं। ताजा मामला बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र का है, जहां एक आईटीआई के नव-निर्मित भवन का भुगतान न होने पर ठेकेदार द्वारा भवन में ताला मारने की घटना सामने आई है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस भवन का उद्घाटन मार्च 2024 में मुख्यमंत्री द्वारा किया जा चुका है। ऐसे में सवाल मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली पर भी उठता है कि जब भवन का उद्घाटन उन्होंने कर दिया तो उस भवन में शैक्षणिक कार्य क्यों नहीं हो रहा था? वह भवन संबंधित विभाग को क्यों नहीं सौंपा गया? क्या मुख्यमंत्री ने सिर्फ दिखाने के लिए वहां अपने नाम की पट्टिका लगाई और उस भवन को भी अपनी चुनावी गारंटी की तरह भूल गए? एक तरफ सरकार लोगों को नौकरी नहीं दे रही है, दूसरी तरफ व्यावसायिक शिक्षा से खुद प्रशिक्षित होकर लोग नौकरी पा सकें, इसमें भी रोड़े अटका रही है। भवन पर ठेकेदार द्वारा ताला मारने की घटना से मुख्यमंत्री सुक्खू के सारे झूठ बेनकाब हो गए हैं। एक तरफ सरकार कहती है कि सभी ठेकेदारों का भुगतान समय पर किया जा रहा है, दूसरी तरफ ढाई साल पहले लोकार्पित हुए भवन का उपयोग भी नहीं होने की बात सामने आई है। इसके अलावा भी कभी आठ महीने से निर्मित पड़े विद्यालय भवन का उद्घाटन करने से शिक्षा मंत्री को रोक दिया जाता है तो कभी किसी भवन का उद्घाटन करने जा रहे मुख्यमंत्री का कार्यक्रम पैसे की कमी से भवन के अधूरा रहने के कारण रद्द कर दिया जाता है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कहीं रेस्ट हाउस में ठेकेदार ताला लगा देता है तो कहीं बीडीओ ऑफिस से भुगतान न होने की वजह से ठेकेदार फर्नीचर उठा ले जाता है और सरकार पूरे मामले पर सिर्फ पर्दा डालने का काम करती है। पूरे प्रदेश में यही स्थिति है। पूर्व सरकार के समय शुरू किए गए कार्य जहां जिस स्थिति में हैं, वहीं अटके पड़े हैं। इसका कारण यह है कि सरकार ने उन परियोजनाओं का बजट या तो रोक दिया है या डायवर्ट कर दिया है, जिसकी वजह से जनहित के लिए शुरू की गई परियोजनाएं समय से पूरी नहीं हो पा रही हैं और प्रदेश के लोग परेशान हो रहे हैं। सुक्खू सरकार सिर्फ अटकाने, लटकाने और भटकाने का खेल खेल रही है। जिस भवन में शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होनी चाहिए थीं, वहां तालाबंदी का खेल चल रहा है। विभागीय मंत्री कहते हैं कि “फंड की कमी” है, जबकि बजट बनाने वाले मुख्यमंत्री दावा करते हैं कि उन्होंने बहुत पढ़-लिखकर बजट तैयार किया है। तो ऐसी स्थिति क्यों आ रही है? पिछले दो वर्षों में न जाने कितने युवा इस भवन का लाभ उठा सकते थे, लेकिन सरकार की नाकामी का शिकार हो गए।

जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में पहली बार ट्रेजरी पर ऐसा पहरा लगा है। ट्रेजरी भी व्हाट्सएप से चल रही है। अपनी सुविधा के अनुसार लोगों के भुगतान करवाए और रोके जा रहे हैं। ठेकेदारों के भुगतान को लेकर एक अलग ही लॉबी काम कर रही है, जो भुगतान के लिए अलग-अलग तरह की शर्तें और प्रलोभन रख रही है। जो उनकी शर्तें मान रहा है, उसे आसानी से भुगतान कर दिया जा रहा है, और जो नहीं मान रहा है, उसे उसका भुगतान नहीं हो रहा है। अगर सरकार ने यही रवैया अपनाया तो आने वाले समय में इसी तरह की और भी घटनाएं सामने आएंगी। इसलिए सरकार ठेकेदारों के भुगतान में तरह-तरह के हथकंडे अपनाना बंद करे।

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Author: speedpostnews

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