ग्रीनलैंड उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों के बीच स्थित दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है।
यह भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका महाद्वीप का हिस्सा माना जाता है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह डेनमार्क का हिस्सा (स्वायत्त क्षेत्र) है।
इसका अधिकांश भाग बर्फ और ग्लेशियरों से ढका रहता है, लगभग 80% क्षेत्र बर्फीला है।
जनसंख्या कितनी है
ग्रीनलैंड में लगभग 57,000 लोग रहते हैं (2025-26 के अनुमान के अनुसार)।
यहां की आबादी में अधिकांश लोग इनुइट (Inuit) हैं, जिनकी अपनी सांस्कृतिक पहचान है।
यह दुनिया के सबसे कम आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है।
ग्रीनलैंड का इतिहास और “देश” का दर्जा
ग्रीनलैंड पर 1721 में डेनमार्क के कब्जे के बाद औपनिवेशिक शासन शुरू हुआ।
1953 में यह डेनमार्क के राज में पूरी तरह शामिल हुआ (कॉलोनी क्षेत्र समाप्त होकर समान प्रशासनिक इकाई बना)।
बाद में 1979 में होम रूल (आंतरिक स्व शासन) मिला, और 2009 में आत्म-शासन (Self-Government Act) लागू हुआ जिससे स्थानीय सरकार के अधिकार बढ़े।
आज ग्रीनलैंड की अपनी संसद और सरकार है, लेकिन बाहरी नीति, रक्षा और मुद्रा डेनमार्क के नियंत्रण में रहते हैं।
यानि ग्रीनलैंड स्वायत्त क्षेत्र है, स्वतंत्र देश नहीं (जैसे एक पूर्ण स्वतंत्र राष्ट्र)।
अमेरिका की नजर ग्रीनलैंड पर क्यों है
अमेरिका ग्रीनलैंड में इसलिए रुचि दिखा रहा है क्योंकि यह स्थान:
1. रणनीतिक (Strategic) महत्व रखता है
ग्रीनलैंड का स्थान यूएस, रूस, यूरोप के बीच है, और यह आर्कटिक सुरक्षा नेटवर्क (जैसे मिसाइल चेतावनी सिस्टम) के लिए महत्वपूर्ण है।
अमेरिका WWII के बाद से ही यहाँ पिटुफिक/थुले एयर बेस जैसे महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान रखता है।
2. प्राकृतिक संसाधनों के लिए
ग्लोबल वार्मिंग से बर्फ पिघलने पर यहाँ कीमती खनिज (rare earth minerals, संभवतः तेल-गैस) तक पहुंच आसान होती जा रही है, जो आर्थिक रूप से महत्त्वपूर्ण हो सकता है।
3. भू-राजनीति और सुरक्षा
रूस और चीन जैसे बड़े देशों के आर्कटिक में बढ़ते प्रभाव के बीच, अमेरिका ग्रीनलैंड को रणनीतिक सुरक्षा के लिए चाह रहा है।
कुछ अमेरिकी नेताओं ने ग्रीनलैंड को खरीदने या नियंत्रण में लेने की बात भी सार्वजनिक रूप से कही है।
अंतरराष्ट्रीय विवाद भी उभर रहा है
डेनमार्क और यूरोपीय नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का संप्रभु हिस्सा है और उसे बेचना या हथियाना संभव नहीं है।
ग्रीनलैंड के स्थानीय लोग और नेता भी अमेरिका में शामिल होने के खिलाफ हैं।



