उत्तर प्रदेश का लाल मंदिर अपनी विशेष वास्तुकला के कारण प्रसिद्ध है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी छत बिना किसी खंभे (pillar/स्तंभ) के बनी हुई है।
यह मंदिर लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है, इसी कारण इसे “लाल मंदिर” कहा जाता है। इसकी छत का निर्माण उस समय की विशेष इंजीनियरिंग और शिल्पकला का नमूना है, जिसमें पत्थरों को इस तरह जोड़ा गया है कि छत को टिकाने के लिए खंभों की आवश्यकता नहीं पड़ी।
माना जाता है कि यह निर्माण प्राचीन भारतीय वास्तुकला के स्थापत्य कौशल को दर्शाता है, जहाँ वजन के संतुलन और जोड़ने की तकनीक से पूरी छत स्थिर खड़ी है।
Author: speedpostnews
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