डॉ. राजीव डोगरा
अरे! अब तुम क्या करोगे
देश को आजाद
तुम तो ढूंढते हो
इंस्टा और फेसबुक पर
सच्चा प्यार।
कभी ढूंढ लेते
तुम उन विचारों को
जो जगा देते
तुम्हारी सोइ हुई
अंतर आत्मा को।
कभी जला लेते
सीने में दफन
दहकते अंगारों को
शायद दिख जाती
स्वतंत्रता की पक्की नींव।
(युवा कवि व लेखक, हिंदी अध्यापक। गांव जनयानकड़
पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
rajivdogra1@gmail.com)
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