डॉ. राजीव डोगरा
आखिरी दोस्त
आखिरी उम्मीद हो तुम।
जीवन के अंतिम अध्याय की
अंतिम कड़ी हो तुम।
मोह का पाश नहीं
स्नेह का अंतिम चरण हो तुम।
मेरे अंतिम जीवन की
अंतिम स्पष्ट किरण हो तुम।
मेरे अधूरे जीवन की
अंतिम मुस्कुराहट हो तुम।
सब कुछ खो जाने के बाद भी
मेरे अंतिम जीवन का
मधुर एहसास हो तुम।
थक सा गया था मैं
युगों के इंतजार के बाद
मेरे अंतिम जीवन के
अंतिम समय का
मोक्ष का आधार हो तुम।
(युवा कवि व लेखक। हिंदी अध्यापक। गांव जनयानकड़। कांगड़ा हिमाचल प्रदेश।
पिन कोड -176038
rajivdogra1@gmail.com)
Author: speedpostnews
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