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सवाल का गुनाह

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साहिल शर्मा

हमने सच बोला तो हर बार ही ख़तावार हुए,
इस दौर में सवाल ही सबसे बड़े अपराध हुए।

जो पूछ बैठा कि हुक्म किसलिए, किसके नाम,
उसी के माथे पे फौरन ही कई इल्ज़ाम हुए।

ख़ामोशी को आज़ादी का तमगा दिया गया,
और जो बोले, वही हर तरह से बदनाम हुए।

तख़्त को डर नहीं होता है सच्चे सवालों से,
डरती है वो हुकूमत जो सच से नाकाम हुए।

नारों का शोर है, तर्क की आवाज़ कहीं नहीं,
भीड़ के इस राज में विवेक सब गुमनाम हुए।

हमने चाहा था जवाब, हमें शक्लें मिलीं,
सवाल का हौसला रखते ही हम बदनाम हुएl

क़ानून की बात की तो नीयत पे वार हुए,
इंसाफ़ की राह में कितने ही अरमान हुए।

साहिल, ये कैसा ज़माना है—हक़ माँगना जुर्म,
जो चुप रहे वही “भले”, जो बोले वही गुनाहगार हुए।

(युवा शायर व कवि हमीरपुर जिला के बाहल अर्जुन गांव के रहने वाले हैं)

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Author: speedpostnews

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