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पटरी पर आत्मनिर्भर भारत की रफ्तार; सपनों की नींद अब सफर में, वंदे भारत स्लीपर से बदलेगा रेल यात्रा का चेहरा

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कांतिलाल मांडोत, वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार व स्तंभकार

नए साल की पहली सुबह देश के करोड़ों रेल यात्रियों के लिए उम्मीद, गर्व और भरोसे की सौगात लेकर आई है। जिस आधुनिक, तेज और सुविधाजनक रेल यात्रा का सपना दशकों से देखा जा रहा था, वह अब साकार होता दिख रहा है। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अगले पखवाड़े से कोलकाता और गुवाहाटी के बीच दौड़ने जा रही है। यह केवल एक नई ट्रेन का शुभारंभ नहीं है, बल्कि यह उस नए भारत का प्रतीक है, जो अब इंतजार नहीं करता, बल्कि योजनाओं को समय पर जमीन पर उतारकर दुनिया को अपनी क्षमता दिखाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेल जिस परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन उसी बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी बनकर सामने आई है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा की गई यह घोषणा पूर्वोत्तर भारत के लिए विशेष महत्व रखती है। लंबे समय तक यह क्षेत्र भौगोलिक कठिनाइयों और सीमित कनेक्टिविटी के कारण विकास की दौड़ में पीछे छूटता रहा। अब वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के जरिए कोलकाता से गुवाहाटी की रात्रिकालीन यात्रा न केवल तेज होगी, बल्कि आराम, सुरक्षा और विश्वस्तरीय सुविधाओं से भी लैस होगी। पूरी तरह एयर कंडीशंड यह ट्रेन लंबी दूरी की यात्रा को थकान भरे अनुभव से निकालकर सुखद सफर में बदल देगी। 16 कोचों वाली इस ट्रेन में 11 थ्री टियर, 4 टू टियर और एक फर्स्ट क्लास कोच होगा, जिसमें एक साथ 823 यात्री सफर कर सकेंगे। यह आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि यह दिखाते हैं कि सरकार आम आदमी से लेकर प्रीमियम वर्ग तक, सभी यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं बना रही है।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता की सोच छिपी है। राजस्थान के कोटा-नागदा सेक्शन पर हुए हाई-स्पीड ट्रायल इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अब केवल तकनीक आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि खुद विश्वस्तरीय तकनीक विकसित करने की क्षमता रखता है। 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती ट्रेन में वाटर टेस्ट के दौरान पानी से भरे गिलास का न हिलना और पानी का न छलकना भारतीय इंजीनियरिंग की सटीकता और परिपक्वता का प्रतीक है। यह दृश्य अपने आप में संदेश देता है कि भारत अब तेज भी है और सुरक्षित भी, आधुनिक भी है और भरोसेमंद भी।
इस ट्रेन के कोचों में दी गई सुविधाएं भारतीय रेल के बदलते चेहरे को दर्शाती हैं। कुशन वाले आरामदायक स्लीपिंग बर्थ, अपर बर्थ तक बेहतर और सुरक्षित पहुंच, नाइट लाइटिंग, रीडिंग लाइट और चार्जिंग पॉइंट यात्रियों की छोटी-छोटी जरूरतों का ख्याल रखते हैं। पब्लिक एड्रेस सिस्टम के साथ विजुअल डिस्प्ले यात्रियों को हर जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध कराएगा। सीसीटीवी कैमरे और आपात स्थिति में सीधे लोको पायलट से संपर्क की सुविधा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रमाण है। मॉड्यूलर पैंट्री और फोल्डेबल स्नैक टेबल यात्रा को सहज और सुविधाजनक बनाते हैं। विमान की तरह एडवांस बायो-वैक्यूम टॉयलेट, दिव्यांग अनुकूल शौचालय और बेबी केयर एरिया यह दिखाते हैं कि यह ट्रेन केवल तेज नहीं, बल्कि संवेदनशील भी है। फर्स्ट क्लास में गर्म पानी के शॉवर जैसी सुविधा भारतीय रेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाओं की श्रेणी में खड़ा करती है।
भारतीय रेल का इतिहास देश के विकास के इतिहास से गहराई से जुड़ा रहा है। आजादी के बाद रेलवे ने न केवल शहरों को गांवों से जोड़ा, बल्कि देश के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को भी मजबूत किया। किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाने से लेकर उद्योगों को कच्चा माल और तैयार उत्पादों के लिए सस्ता परिवहन देने तक, रेलवे ने विकास की धुरी के रूप में काम किया है। सैनिकों की आवाजाही, आपदा के समय राहत सामग्री की आपूर्ति और तीर्थयात्रियों से लेकर छात्रों तक, हर वर्ग की जरूरतों को पूरा करने में रेलवे ने अहम भूमिका निभाई है। आज जब भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह मजबूत कर रहा है, तब रेलवे का आधुनिकीकरण इस प्रगति को नई गति दे रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे में जो बदलाव आए हैं, वे केवल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं। स्टेशनों का पुनर्विकास, डिजिटल टिकटिंग, स्वच्छता पर जोर, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम और सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों की शुरुआत ने रेलवे की छवि को पूरी तरह बदल दिया है। वंदे भारत ट्रेनें इसी सोच का परिणाम हैं, जिनमें ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। डिजाइन से लेकर निर्माण तक, अधिकतर कार्य देश में ही किया गया है, जिससे न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का विस्तार भविष्य की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। अगले छह महीनों में आठ और स्लीपर ट्रेनें शुरू करने की योजना और 2026 के अंत तक इनकी संख्या 12 तक पहुंचाने का लक्ष्य यह बताता है कि सरकार लंबी दूरी की रेल यात्रा को पूरी तरह नए स्तर पर ले जाना चाहती है। आगे चलकर देशभर में 200 से अधिक वंदे भारत ट्रेनों के संचालन की योजना भारतीय रेल को विश्व की सबसे आधुनिक रेल प्रणालियों में शामिल करने की दिशा में बड़ा कदम है। यह योजना न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति देगी।
कोलकाता से गुवाहाटी के बीच चलने वाली यह पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पूर्वोत्तर भारत के लिए विकास का नया द्वार खोलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार बढ़ेगा, पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यह ट्रेन केवल दो शहरों को नहीं जोड़ेगी, बल्कि पूर्वोत्तर को देश की मुख्यधारा से और मजबूत तरीके से जोड़ने का काम करेगी। यही वह सोच है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में भारत को आत्मविश्वास से भरे राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है।
आज जब दुनिया भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है, तब वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जैसी उपलब्धियां देश के सामर्थ्य का प्रमाण बनती हैं। यह उपलब्धि बताती है कि मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट दृष्टि और सही नीयत हो तो बड़े से बड़ा सपना भी हकीकत बन सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेल न केवल पटरियों पर दौड़ रही है, बल्कि विकास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव की राह पर भी तेजी से आगे बढ़ रही है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इसी यात्रा का वह पड़ाव है, जो आने वाले वर्षों में भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का भरोसा देता है।

(पता : L 103 जलवन्त टाऊनशिप पूणा बॉम्बे मार्केट रोड, नियर नन्दालय हवेली सूरत, गुजरात फोन नंबर 99749 40324)

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Author: speedpostnews

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