राजेन्द्र पालमपुरी
मिट्टी में मिल जाए मिट्टी
फिर कब हाथ में आए मिट्टी
बरसों तक यह साथ है रहती
पलक झपकते जाए मिट्टी।
मिट्टी मिट्टी मिट्टी मिट्टी
दुनियां सारी गाए मिट्टी
चलती रहे तो लंबी चलती
और कभी थम जाए मिट्टी।
कभी खुशी तो कभी गमीं में
जश्न है खूब मनाए मिट्टी
आज यहां कल उधर झूमती
किसको नहीं है भाए मिट्टी।
कभी कभी तो आसमान की
भी है सैर कराए मिट्टी
पल भर में ही फिर इसी जमीं पर
इंसां को ले आए मिट्टी।
चुप न बैठे खूब भागती
खुद को बड़ा सताए मिट्टी
फिर जब इसका जोर चले न
मिट्टी में सो जाए मिट्टी।
(राजेन्द्र पालमपुरी हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार हैं। उनका फोन नंबर 70189 03315 हैै)
Author: speedpostnews
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