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वीर बाल दिवस

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वंशिका संधू

वीर बाल दिवस हर वर्ष दिसंबर महीने की 26 तारीख को मनाया जाता है। इस दिन मुगलों के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हुए गुरु गोविंद सिंह जी के बेटों की वीरता और साहस को याद किया जाता है। यह वीर बाल दिवस गुरु गोविंद सिंह जी के दो छोटे बेटों साहबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह की महान शौर्य गाथा को समर्पित है। इन दोनों ने केवल 9 वर्ष और 7 वर्ष की उम्र में ऐसा साहस और वीरता दिखाई, जिसकी मिसाल पूरे इतिहास में बहुत कम दिखाई पड़ती है।

साल 1704 में आनंदपुर साहिब की लड़ाई के दौरान गुरु गोविंद सिंह जी का पूरा परिवार बिछड़ गया था। माता गुजरी जी और दोनों छोटे साहिबजादों को सरहिंद के नवाब वजीर खान ने पकड़ लिया और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए लालच भी दिया और ड्रायर धमकाया भी, परंतु दोनों वीरों ने एक ही जवाब दिया ” *हम अपना धर्म नहीं छोड़ेंगे”* उनकी आंखों में साहस साफ दिखाई दे रहा था यह जवाब सुनकर सरहिंद के नवाब वजीर खान को क्रोध आ गया और उसने उन दोनों वीरों को दीवार में चुनवा दिया। यह सजा बहुत ही बुरी थी। परंतु दोनों साहिबजादे बिल्कुल भी नहीं डरे और केवल अपने भगवान को याद कर उनका जयकारा लगाने लगे ” *वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह”* वह अपने धर्म और सत्य के लिए हंसते-हंसते बलिदान हो गए।

उसी वक्त गुजरी माता ने गढीें में अपने प्राण त्याग दिए। उस एक ही दिन में तीन-तीन महान आत्माओं के बलिदान ने पूरे सिख इतिहास को गर्व से भर दिया।

वीर बाल दिवस हमें यह सिखाता है कि साहस उम्र पर निर्भर नहीं करता और सत्य की राह मुश्किल हो सकती है, परंतु उसे अपनाने वाले सदा अमर होते हैं। गुरु गोविंद जी का परिवार पूरे भारतवर्ष के लिए एक महान मिसाइल है। उनका परिवार हमें त्याग, धर्मनिष्ठा, निडरता और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देता है। इसलिए कहा गया है कि वीर बाल दिवस एक दिन नहीं है, बल्कि एक ऐसी सीख है जिसे हर पीढ़ी को अपनाना चाहिए।

(10वीं कक्षा की छात्रा, राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गाहलियां, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश)

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Author: speedpostnews

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