हैं एक समय था, जब यह माना जाता था कि ब्रेस्ट कैंसर विदेश में होने वाली बीमारी है. मगर आज इंडिया में यह बीमारी कामन होती जा रही है. हालांकि विदेश में इसकी चपेट में आने वाली महिलाओं की ऐज पचास के आसपास होती है मगर इंडिया में 45 से 50वर्ष की आयु वाली महिलाओं में ज्यादा पाया जा रहा है. पांच से छह प्रतिशत मामलों में यह जेनेटिक होता है. यानी कि यदि किसी घर के बुजुर्ग में पहले यह बीमारी थी तो आगे उसकी संतान को भी ब्रेस्ट कैंसर होने का रिस्क रहता है. मगर ऐसा नहीं है कुछेक मामलों में ब्रेस्ट कैंसर उनमें भी देखने को मिला है, जिनकी फैमिली में पहले किसी को यह बीमारी थी. इसका मतलब यह है कि वो फैमिली भी रिस्क जोन में हैं, जिनके परिवार में यह जेनेटिक फैक्टर नहीं है. इसलिए हम सबको इसके प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है.
क्या है ब्रेस्ट कैंसर : ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) एक ऐसी स्थिति है जिसमें स्तन की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यह कैंसर महिलाओं में सबसे आम है, हालांकि पुरुषों में भी यह हो सकता है। अगर समय रहते इसका निदान और इलाज न हो, तो यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है।
क्या हैं ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण शुरुआती लक्षण दिखें तो क्या करें
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती सिंप्टम स्पष्ट नहीं होते, लेकिन इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है:
1. स्तन में गांठ: स्तन या उसके आसपास (बगल में) कोई कठोर गांठ का महसूस होना।
2. आकार या आकार में बदलाव: स्तन के आकार या शेप में असमानता।
3. त्वचा में बदलाव: स्तन की त्वचा पर झुर्रियां या खिंचाव जैसा दिखना।
4. निप्पल से स्राव: निप्पल से ब्लड या किसी अन्य तरह का रिसाव आना।
5. निप्पल में बदलाव: निप्पल का अंदर की ओर धंस जाना या उसका आकार बदल जाना।
6. लालिमा या सूजन: स्तन की त्वचा पर लालिमा, सूजन, या गर्म महसूस होना।
7. दर्द: स्तन या निप्पल में लगातार दर्द रहना।
ब्रेस्ट कैंसर का निदान
ब्रेस्ट कैंसर का निदान कई चरणों में किया जाता है:
1. स्व-निरीक्षण:
महिलाएं स्वयं अपने स्तनों को नियमित रूप से जांचें और किसी असामान्य बदलाव का पता लगाएं।
2. चिकित्सीय परीक्षण:
डॉक्टर के पास जाकर शारीरिक परीक्षण कराना।
3. मेमोग्राफी:
स्तन की एक्स-रे करके गांठ या असामान्य वृद्धि का पता लगाना। यह 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
4. अल्ट्रासाउंड और एमआरआई:
स्तन के अंदरूनी हिस्सों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए।
5. बायोप्सी:
गांठ के टिशू को निकालकर माइक्रोस्कोप के तहत जांच करना, जिससे कैंसर की पुष्टि होती है।
6. जेनेटिक परीक्षण:
यदि परिवार में कैंसर का इतिहास है, तो BRCA1 और BRCA2 जीन का परीक्षण किया जा सकता है।
निष्कर्ष
ब्रेस्ट कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन यदि इसे शुरुआती चरण में पहचान लिया जाए, तो इसका उपचार संभव है। हर महिला को नियमित रूप से अपने स्तन की जांच करनी चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सही समय पर निदान और इलाज से इस बीमारी को रोका जा सकता है।




