द एशेज (The Ashes) क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज में से एक है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच सीरीज शुक्रवार से शुरू हो रही है। और जैसा इतिहास में अधिकतर हुआ है, यह भी पांच मैचों की टेस्ट सीरीज होगी।
एशेज का इतिहास और महत्व
1. शुरुआत और नामकरण
“एशेज” (Ashes) नाम 1882 में आया था, जब ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को इंग्लैंड की जमीन पर हराया था।
उस हार के बाद इंग्लिश अखबार The Sporting Times में एक व्यंग्यात्मक “श्रद्धांजलि संदेश” छपा, जिसमें कहा गया कि “इंग्लिश क्रिकेट की मौत हो गई है, उसके अवशेष (ashes) ऑस्ट्रेलिया ले जाएगा।”
इसके बाद से, जब भी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज होती है, तो ट्रॉफी को “एशेज” कहा जाता है।
2. प्रतिद्वंद्विता
यह सीरीज इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट क्रिकेट की सबसे पुरानी और तीव्र प्रतिद्वंद्विताओं में से एक है।
इसमें दोनों टीमों के बीच बहुत अधिक गौरव, इतिहास और प्रतिस्पर्धा जुड़ी हुई है। यह सिर्फ एक खेल सीरीज नहीं है, बल्कि यह सम्मान, राष्ट्रीय गर्व और क्रिकेट विरासत का प्रतीक माना जाता है।
3. सीरीज का प्रारूप
जैसा कि कहा गया, अधिकांश एशेज सीरीज पांच टेस्ट मैचों की होती हैं।
हालाँकि इतिहास में कुछ बदलाव हुए हैं — कभी-कभी चार-मैच या छः-मैच सीरीज भी हुई हैं।
अगर सीरीज ड्रा होती है (मतलब दोनों टीमें बराबर मैच जीतें), तो एशेज ट्रॉफी पिछली धारक टीम के पास बनी रहती है।
4. विजेता रिकॉर्ड
अब तक कुल बहुत सारी एशेज सीरीज हो चुकी हैं।
ऑस्ट्रेलिया ने अधिकांश सीरीज जीती हैं — और इंग्लैंड के पास भी कई जीत हैं।
यह सीरीज दोनों देशों की टेस्ट क्रिकेट बिरादरी के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
5. सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
एशेज सिर्फ एक स्पोर्ट-इवेंट नहीं है — यह क्रिकेट के इतिहास, परंपराओं और बड़े रोमांच का प्रतीक है।
बहुत सारे महान खिलाड़ी (जैसे कि डॉन ब्रैडमैन, सर अलास्टेयर कुक, इत्यादि) ने एशेज में अपने कॅरियर के सच-मोल पलों को देखा है।
यह सीरीज दोनों टीमों के क्रिकेट प्रेमियों के लिए “गर्व की लड़ाई” जैसा होता है।



