अस्पतालों में आग लगने के मामले लगातार हो रहे हैं, और ये बहुत चिंताजनक है। ऐसा क्यों हो रहा है, मुख्य कारण क्या हैं, और इन घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं:
क्यों अस्पतालों में आग लगती है
बिजली की खराबी (Short circuits, overloading)
अध्ययन बताते हैं कि भारत में अस्पतालों में लगी आगों में ~78% मामलों में कारण इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट होती है। एडवांस ऑक्सीजन सपोर्ट उपकरण, एसी, अन्य मशीनें आदि ज्यादा बिजली मांग करती हैं, और वायर्स/पावर प्लांटिया पर्याप्त मजबूत नहीं होते।
अत्यधिक विद्युत लोड/गलत वायरिंग
नए उपकरण जोड़े जाते हैं, ICU बढ़ाए जाते हैं, लेकिन विद्युत प्रणालियों को उसी अनुसार अपग्रेड नहीं किया जाता। नगर निगम या अस्पताल प्रबंधन द्वारा वायरिंग, पावर सप्लाई, सर्किट ब्रेकर्स आदि की नियमित जांच नहीं होती।
ऑक्सीजन व अन्य ज्वलनशील गैसों का प्रयोग
ICU व ऑपरेशन थियेटर जैसे विभागों में ऑक्सीजन/गैस की लाइनें होती हैं, जिससे वातावरण ऑक्सीजन से भरा हो जाता है, जो आग को तेजी से फैलाता है। छोटे चिंगारी से भी समस्या बढ़ सकती है।
ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल/ असुरक्षित भंडारण
सैनेटाइज़र, प्लास्टिक सामग्री, प्लास्टर ऑफ पेरिस, सॉल्वेंट्स आदि जैसे पदार्थ। इनका सही भंडारण न होना, निकट कहीं गर्म स्रोत या धूल जमा होना आग का कारण बनता है।
अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन न करना
Fire & Life Safety के मानदंडों का उल्लंघन
नियमित निरीक्षण (fire audits) न होना
Fire No Objection Certificate (NOC) न मिलना या न नवीनीकरण किया जाना
आपातकालीन तैयारी (Emergency Preparedness) की कमी
स्टाफ के बीच अग्नि सुरक्षा प्रशिक्षण नहीं होना
निकास मार्ग (exit routes) स्पष्ट न होना या अवरुद्ध होना
फायर अलार्म, डिटेक्टर, स्प्रिंकलर सिस्टम आदि कार्य नहीं कर रहे हों
भवन डिज़ाइन की कमजोरियां
कई अस्पताल पुराने भवनों में हैं, जिनमें बचाव गाइडेंस, फायर रेटेड दीवारें, अलग-अलग धुआँ मार्ग (smoke ducts), वेंटिलेशन आदि सुरक्षित नहीं हैं। भवनों का विस्तार करने या ICU आदि जोड़ने पर संरचनात्मक बदलाव नहीं किए जाते।
रोकने के क्या उपाय हो सकते हैं
नियमित इलेक्ट्रिकल ऑडिट और सिस्टम अपग्रेडेशन
अस्पतालों को चाहिए कि वे हर छह महीने या एक साल में इलेक्ट्रिकल लोड ऑडिट करें, वायरिंग की जाँच करें, पुरानी तारों और सॉकेट्स को बदलें, और सुनिश्चित करें कि विद्युत आपूर्ति उपकरण अस्पताल के बढ़े हुए काम को संभाल सकती हो।
फायर सुरक्षा उपकरणों का रख-रखाव
अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर, फायर एस्टिंग्यूशर आदि नियमित रूप से जांचे जाएँ।
उनका एक्सपायरी डेट ठीक हो, कार्य क्षमता हो।
ऑक्सीजन सुरक्षा नियम कड़ाई से लागू हों
ऑक्सीजन सप्लाय प्वाइंट्स/लाइनें अच्छी तरह से चिह्नित हों; धुआँ या आग के स्रोत जैसे इलेक्ट्रिकल सॉकेट, हीटिंग इकाइयाँ उनसे दूरी पर हों; धूम्रपान व अन्य आग के स्रोतों पर रोक हो।
भवन डिजाइन एवं निर्माण मानकों का पालन
फायर-रेसिस्टेंट सामग्री का उपयोग
पर्याप्त और स्पष्ट आपातकालीन निकास मार्ग
धुएँ को बांटने वाली दीवारें / डोर/ वेंटिलेशन निर्बाध हों।
आपातकालीन प्रशिक्षण व ड्रिल्स:
अस्पताल कर्मियों (डॉक्टर, नर्स, सपोर्ट स्टाफ) को अग्नि घटना के दौरान क्या करना है इसकी नियमित ट्रेनिंग हो। समय-समय पर mock drills कराये जाएँ।
नियामक प्राधिकरणों की सक्रियता और निगरानी
सरकारी एजेंसियाँ (fire department, health department) सुनिश्चित करें कि अस्पतालों के पास वैध Fire Safety NOC हो, नियमित निरीक्षण हों, उल्लंघन पर दंड हो।
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