प्राचीन मिस्र (और बाद में प्राचीन यूनान) में महिलाओं के गर्भावस्था परीक्षण के लिए एक रोचक परंपरा थी।
प्राचीन मिस्र का गर्भ परीक्षण तरीका
महिलाएं गेहूँ (wheat) और जौ (barley) के बीजों पर अपना मूत्र (urine) करती थीं।
अगर बीज अंकुरित हो जाते, तो इसका मतलब होता कि महिला गर्भवती है।
यह भी माना जाता था कि अगर जौ उगता है तो पुत्र होगा और अगर गेहूँ उगता है तो पुत्री।
अगर कुछ नहीं उगता, तो इसका मतलब होता था कि महिला गर्भवती नहीं है।
आधुनिक विज्ञान क्या कहता है
1960 के दशक में वैज्ञानिकों ने इस पर शोध किया। पाया गया कि गर्भवती महिलाओं के मूत्र में एस्ट्रोजन हार्मोन होता है, जो बीजों के अंकुरण को तेज कर सकता है।
यानी यह तरीका पूरी तरह अंधविश्वास नहीं था, इसमें कुछ वैज्ञानिक आधार भी था।
हालांकि लड़का या लड़की की पहचान वाला हिस्सा सही नहीं है।
यह दुनिया के सबसे पुराने “गर्भ परीक्षणों” (pregnancy test) में से एक माना जाता है और इसे पपीरस ग्रंथों (Papyrus manuscripts) में दर्ज भी किया गया है।



