शहरों की गंदगी और कूड़े के ढेर वहां की जनसंख्या, शहरी प्रबंधन, कचरा निपटान व्यवस्था और औद्योगिक प्रदूषण पर निर्भर करते हैं। दुनिया में कई शहर ऐसे हैं जहाँ सफाई की कमी और कचरा निस्तारण की कमजोर व्यवस्था के कारण वे गंदे शहरों की सूची में आते हैं। इनमें से तीन प्रमुख उदाहरण हैं।
1. पोर्ट-औ-प्रिंस (Port-au-Prince), हैती
हैती की राजधानी पोर्ट-औ-प्रिंस दुनिया के सबसे गंदे शहरों में मानी जाती है।
यहाँ की सड़कों और बस्तियों में कूड़े के बड़े-बड़े ढेर पड़े रहते हैं।
गरीबी, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएँ और कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था सफाई व्यवस्था को प्रभावित करती हैं।
कचरे से निकलने वाली दुर्गंध और गंदे पानी से कॉलरा और डेंगू जैसी बीमारियाँ तेजी से फैलती हैं।
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2. गयाना (Guyana) का जॉर्जटाउन (Georgetown)
दक्षिण अमेरिका का यह शहर गंदगी और कचरे के लिए बदनाम है।
यहाँ ड्रैनेज सिस्टम बहुत खराब है, बारिश के मौसम में कचरा नालियों में भरकर बाढ़ जैसी स्थिति पैदा करता है।
सड़कों पर खुले में पड़ा कचरा और गंदे पानी से पूरे इलाके में मच्छरजनित रोग फैलते रहते हैं।
सफाई और रिसाइक्लिंग की व्यवस्था लगभग न के बराबर है।
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3. दिल्ली (Delhi), भारत
भारत की राजधानी दिल्ली में जनसंख्या और कचरे का दबाव बहुत ज्यादा है।
यहाँ गाजीपुर, भलस्वा और ओखला जैसे कूड़े के पहाड़ दुनिया के सबसे बड़े डंपिंग यार्ड में गिने जाते हैं।
करीब 11,000 टन ठोस कचरा रोज़ निकलता है, जिसमें से आधे से ज्यादा का सही निस्तारण नहीं हो पाता।
कूड़े के ढेरों से निकलने वाली जहरीली गैसें और लीचेट (कचरे का तरल) वायु व जल प्रदूषण को गंभीर बना देते हैं।
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कचरे का सही प्रबंधन नहीं
इन तीनों शहरों की समस्या एक जैसी है— कचरे का सही प्रबंधन न होना, सफाई तंत्र की कमजोरी और बढ़ती जनसंख्या का दबाव। कूड़े के ढेर सिर्फ शहर की छवि को खराब नहीं करते बल्कि लोगों की स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा बनते हैं।
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