ईरान और इज़रायल दोनों ही पश्चिमी एशिया के प्रभावशाली देश हैं, जिनकी सैन्य ताकत क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि दोनों देशों की जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और भूगोल में अंतर है, लेकिन उनकी सैन्य क्षमताएं एक-दूसरे को चुनौती देने में सक्षम हैं। क्षेत्रफल की बात करें तो इजरायल से लगभग 80 गुणा बड़ा है ईरान।
जनसंख्या और बजट
ईरान की जनसंख्या लगभग 8.6 करोड़ है, जबकि इज़रायल की जनसंख्या करीब 1 करोड़ है। इसके बावजूद, इज़रायल का रक्षा बजट ईरान की तुलना में कहीं अधिक तकनीकी और आधुनिक हथियारों पर केंद्रित है। ईरान का रक्षा बजट लगभग 25 बिलियन डॉलर (अनौपचारिक अनुमान), जबकि इज़रायल का बजट लगभग 24 बिलियन डॉलर है, लेकिन तकनीकी श्रेष्ठता की वजह से इज़रायल को बढ़त मिलती है।
सेना की संख्या और संरचना
ईरान की सशस्त्र सेनाओं में लगभग 5.75 लाख सक्रिय सैनिक और 3.5 लाख रिजर्व सैनिक हैं। इसमें ईरान की नियमित सेना (Artesh) और कट्टरपंथी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) शामिल हैं। वहीं, इज़रायल के पास करीब 1.7 लाख सक्रिय सैनिक और 4.5 लाख रिजर्व हैं।
तकनीकी और हथियार क्षमता
इज़रायल के पास उन्नत तकनीकी हथियार, मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग), आधुनिक ड्रोन तकनीक और अमेरिका से प्राप्त F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर जेट्स हैं। वहीं, ईरान के पास पुराने रूसी और स्वदेशी लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइलें (जैसे शाहब-3, फतेह-110), और ड्रोन क्षमताएं हैं, जो हाल के वर्षों में विकसित हुई हैं।
परमाणु शक्ति
इज़रायल के पास अनुमानतः 80–100 परमाणु हथियार हैं, हालांकि वह कभी इसकी पुष्टि नहीं करता। ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, लेकिन पश्चिमी देशों को आशंका है कि वह परमाणु बम की दिशा में बढ़ रहा है।
साइबर युद्ध और खुफिया एजेंसियां
इज़रायल की साइबर क्षमताएं विश्व की अग्रणी हैं और उसकी खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ बेहद प्रभावशाली मानी जाती है। ईरान भी साइबर युद्ध में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है और उसने इज़रायल के खिलाफ कई साइबर हमले किए हैं।
दोनों की अपनी-अपनी सैन्य ताकत
कुल मिलाकर, ईरान के पास अधिक सैनिक और क्षेत्रीय प्रभाव है, जबकि इज़रायल तकनीकी रूप से कहीं अधिक उन्नत और रणनीतिक रूप से संगठित है। अगर टकराव होता है, तो दोनों की क्षमताएं अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभावशाली साबित हो सकती हैं, लेकिन इज़रायल की तकनीकी श्रेष्ठता उसे युद्ध में बढ़त दिला सकती है।



