गिद्ध एक अनोखा और बेहद महत्वपूर्ण पक्षी है जो प्राकृतिक सफाईकर्मी की भूमिका निभाता है। यह मुख्य रूप से मरे हुए जानवरों का मांस खाता है, जिसमें अक्सर खतरनाक बैक्टीरिया और रोगजनक जीवाणु होते हैं जैसे कि एंथ्रेक्स, बोटुलिज़्म और साल्मोनेला। जहां ये बैक्टीरिया अन्य जानवरों या इंसानों के लिए जानलेवा हो सकते हैं, वहीं गिद्ध इन्हें बिना किसी नुकसान के पचा लेता है। इसका कारण गिद्ध की पाचन प्रणाली की विशेष बनावट और उसकी अत्यधिक अम्लीय पाचन रस है।
गिद्ध का पेट इतना अम्लीय होता है कि उसका pH स्तर लगभग 1 तक होता है, जो किसी भी सामान्य जीव के लिए असहनीय है। यह अम्लीय वातावरण लगभग सभी प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस को मार देता है। इसके अलावा, गिद्धों की आंतों में ऐसे विशेष एंजाइम्स और सूक्ष्मजीव होते हैं जो विषैले पदार्थों को निष्क्रिय कर देते हैं। यही कारण है कि गिद्ध बिना बीमार हुए मरे हुए जानवरों को खाकर पर्यावरण को साफ रखता है और बीमारियों के प्रसार को रोकता है।
इसलिए गिद्ध इन जानवरों पर करता है उल्टी
अब बात करते हैं गिद्ध की एक अनोखी और कुछ हद तक डरावनी रक्षा प्रणाली की—उल्टी करना। जब गिद्ध को खतरे का आभास होता है, खासकर यदि कोई शिकारी जानवर जैसे बिल्ली, लोमड़ी या कुत्ता उसके पास आता है, तो वह अपने पेट की सामग्री को बाहर उगल देता है। यह उल्टी इतनी दुर्गंधयुक्त और अम्लीय होती है कि दुश्मन जानवर इससे डरकर भाग जाते हैं। यह व्यवहार दो तरह से फायदेमंद होता है—पहला, दुश्मन को डराने और दूर रखने के लिए, और दूसरा, शरीर का भार हल्का करने के लिए ताकि गिद्ध तुरंत उड़ सके। जब पेट खाली हो जाता है, तो उड़ान भरना आसान हो जाता है।
गिद्ध की यह उल्टी केवल दुर्गंध के कारण ही नहीं, बल्कि उसमें मौजूद संक्रामक बैक्टीरिया और तेज़ एसिड के कारण भी खतरनाक होती है। यह गिद्ध के लिए एक प्रभावशाली जैविक हथियार की तरह काम करता है। कई बार शिकारी जानवर इससे बीमार पड़ सकते हैं या उनकी आंखों और नाक में जलन हो सकती है।
इस प्रकार, गिद्ध न केवल पर्यावरण के लिए उपयोगी है, बल्कि उसकी अनोखी शारीरिक संरचना और व्यवहार उसे प्रकृति के सबसे मज़बूत और चतुर जीवों में से एक बनाते हैं। गिद्ध की यह अनोखी क्षमता उसे प्रकृति में एक अहम स्थान दिलाती है।



