ख़ज़ाने का सफर
बीत गया जो समय न लौटकर आएगा,
चौदह वर्ष की जिंदगी, पर वो पांच साल की यादें।
धुंधलाती यादें ले आतीं समंदर यादों का आंखों में याद था बस वो जहाज़,
जो उड़ा ले गया मुझे मेरे खजाने के पास, मेरे बचपन के पास।
वो सूरज की किरण, वो समंदर, वो लोग, वो जगह।
दोस्तों के साथ की जिंदगी, मेरी नृत्य कला।
न जाने कब दिल के इतने करीब आ गए कि आंखें बंद की और यादें बन कर रह गईं।
खुशी हुई इन यादों को पाकर,
अब कश्ती निकल पड़ी, नई यादों के सफर पर।
कैद कर लिया इस खजाने को, अब उम्मीद है नया और भी चमचमाते ख़ज़ाने इंतजार कर रहा हो।
–आसमी वालिया, कक्षा दसवीं ए, जीडी गोएंका पब्लिक स्कूल ढगवार, धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश
Author: speedpostnews
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One Comment
Beautiful poem . Poem is crested with selected pearls of words. Superb.