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हिमाचल में एक अंगुली से हिलने वाली रहस्यमयी चट्टान; पर इसे गिरा नहीं सकते, धार्मिक आस्था कहें या विज्ञान का प्रभाव

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हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यमयी स्थानों के लिए जाना जाता है। यहाँ के पहाड़, घाटियां, नदियां और झरने ही नहीं, बल्कि कई अनोखी और चमत्कारी चीजें भी देखने को मिलती हैं। इन्हीं में से एक है एक ऐसी चट्टान, जिसे एक अंगुली से हिलाया जा सकता है, लेकिन उसे गिराना असंभव है। यह चमत्कारी चट्टान हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित है। यह लोगों के लिए यह आश्चर्य का विषय बनी हुई है।

मंडी से लगभग 90 किलोमीटर दूर
यह विशाल चट्टान मंडी जिले के जंजैहली के कुथाह गांव में है। इसे पांडव शिला कहते हैं। यह स्थान मंडी शहर से लगभग 90 किलोमीटर दूर है। मान्यता है कि पांडव शिला को पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान निशानी के तौर पर रखा था। मनोकामना पूरी करने की इच्छा में लोग इस पांडव शिला पर छोटे पत्थर फेंकते हैं। निसंतान महिलाएं संतान प्राप्ति की इच्छा से कंकड़ फेंकती हैं। यदि पत्थर शिला पर अटक जाए तो मनोकामना पूर्ण हो जाती है। यदि नीचे गिर जाए तो माना जाता है कि मनोकामना पूरी नहीं होगी।

गुरुत्वाकर्षण के कारण संतुलन
यह चट्टान एक खास संतुलन बिंदु पर टिकी हुई है, जिससे हल्का सा धक्का देने पर यह हिलती हुई प्रतीत होती है, लेकिन कितनी भी ताकत लगाने के बावजूद यह अपनी जगह से गिरती नहीं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह चट्टान अपने गुरुत्वाकर्षण केंद्र के कारण संतुलित बनी हुई है। इस तरह के प्राकृतिक अजूबे बहुत कम देखने को मिलते हैं।

ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यता
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह चट्टान किसी दैवीय शक्ति के कारण अपने स्थान पर स्थिर है। कुछ कथाओं के अनुसार यह स्थान प्राचीन समय में ऋषियों और साधुओं की तपस्थली रहा है, और यह चट्टान किसी महर्षि की तपस्या से जुड़ी हो सकती है। वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह एक चमत्कारी शक्ति का प्रतीक है, जो हिमाचल की पवित्र भूमि की रक्षा करती है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिकों के अनुसार इस चट्टान का संतुलन उसकी संरचना और गुरुत्वाकर्षण बल के कारण बना हुआ है। कई बार ऐसा होता है कि कुछ चट्टानें लाखों वर्षों तक धीरे-धीरे हवा और पानी के कटाव से इस प्रकार आकार ले लेती हैं कि उनका गुरुत्वाकर्षण केंद्र एकदम सटीक संतुलन में आ जाता है। ऐसे में थोड़ी सी भी ताकत लगाने पर ये हिलने लगती हैं, लेकिन पूरी तरह गिरने के लिए इन्हें जबरदस्त बाहरी बल की आवश्यकता होती है, जो स्वाभाविक रूप से नहीं लग पाता।

पर्यटकों के लिए आकर्षण
यह चमत्कारी चट्टान हिमाचल आने वाले पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गई है। दूर-दूर से लोग इसे देखने और स्वयं इसे अपनी उंगली से हिलाने का अनुभव लेने आते हैं। यह स्थान न केवल रोमांचकारी है, बल्कि विज्ञान और प्रकृति के अद्भुत संतुलन का एक जीता-जागता उदाहरण भी है।

प्रकृति की अद्भुत रचना
हिमाचल प्रदेश की यह रहस्यमयी चट्टान प्रकृति की अद्भुत रचना है। यह न केवल विज्ञान और आध्यात्म का संगम दर्शाती है, बल्कि यह दिखाती है कि प्रकृति में कितने आश्चर्यजनक रहस्य छिपे हुए हैं। चाहे इसे वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए या पौराणिक मान्यता के रूप में, यह चट्टान हिमाचल प्रदेश की विरासत का एक अनमोल हिस्सा है।

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Author: speedpostnews

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