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क्यों होती है एलर्जी, किस सीजन में ज्यादा होती है और कैसे करें उपचार

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एलर्जी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) की किसी सामान्य पदार्थ के प्रति जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया है। धूल, परागकण, धुआं, कुछ खाद्य पदार्थ, दवाएं, पालतू जानवरों की रूसी और कीड़े-मकौड़े इसके आम कारण हो सकते हैं।

एलर्जी क्यों होती है?
जब एलर्जी वाले व्यक्ति के शरीर में कोई संवेदनशील पदार्थ प्रवेश करता है तो इम्यून सिस्टम उसे हानिकारक समझकर प्रतिक्रिया करता है। इससे हिस्टामिन जैसे रसायन निकलते हैं और छींक, नाक बहना, आंखों में खुजली, त्वचा पर चकत्ते, खांसी या सांस लेने में परेशानी हो सकती है। आनुवंशिक प्रवृत्ति, प्रदूषण और बार-बार किसी एलर्जेन के संपर्क में आना भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

किस मौसम में एलर्जी ज्यादा होती है?
यह एलर्जी के प्रकार पर निर्भर करता है।
बसंत: पेड़ों और फूलों के परागकण बढ़ने से नाक और आंखों की एलर्जी ज्यादा हो सकती है।
गर्मी: धूल, प्रदूषण और कुछ प्रकार के परागकण समस्या बढ़ा सकते हैं।
बरसात: नमी बढ़ने से फफूंद और धूल के कण (डस्ट माइट) बढ़ सकते हैं।
सर्दी: बंद कमरों में धूल, डस्ट माइट और पालतू जानवरों के एलर्जेन के संपर्क से परेशानी बढ़ सकती है।
इसलिए एलर्जी केवल किसी एक मौसम की बीमारी नहीं है।

उपचार और बचाव
एलर्जी का सबसे प्रभावी उपाय है जिस पदार्थ से एलर्जी होती है, उससे बचना। इसके साथ:
घर में धूल और फफूंद जमा न होने दें तथा नियमित सफाई करें।
परागकण या प्रदूषण अधिक होने पर बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।
आंखों और चेहरे को बाहर से आने के बाद साफ पानी से धोना उपयोगी हो सकता है।
डॉक्टर की सलाह से एंटीहिस्टामिन, नाक के स्प्रे या अन्य दवाएं ली जा सकती हैं।
बार-बार एलर्जी होने पर डॉक्टर एलर्जी टेस्ट करवाकर कारण पता कर सकते हैं।
गंभीर या लगातार एलर्जी में विशेषज्ञ द्वारा एलर्जेन इम्यूनोथेरेपी पर विचार किया जा सकता है।

सांस लेने में अचानक बहुत परेशानी, गले/जीभ में सूजन, चक्कर या पूरे शरीर में तेजी से एलर्जी की प्रतिक्रिया हो तो यह गंभीर स्थिति हो सकती है और तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

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