काजोल का अभिनय हिंदी सिनेमा की कई दूसरी अभिनेत्रियों से इसलिए अलग माना जाता है क्योंकि वह अभिनय को बहुत अधिक “परफेक्ट” दिखाने के बजाय स्वाभाविक और सहज रखने की कोशिश करती हैं। उनकी कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं
स्वाभाविक भाव-भंगिमा काजोल के चेहरे और आंखों के भाव संवादों के साथ-साथ बहुत कुछ कह देते हैं। उनकी हंसी, गुस्सा, भावुकता और आश्चर्य अक्सर बनावटी नहीं लगते।
संवाद बोलने का अपना अंदाज वह संवादों को बहुत ज्यादा नाटकीय बनाने के बजाय उन्हें बातचीत की तरह प्रस्तुत करती हैं। यही वजह है कि उनके किरदार दर्शकों को वास्तविक लगते हैं।
ऊर्जावान व्यक्तित्व
काजोल के अभिनय में एक खास ऊर्जा दिखाई देती है। चाहे रोमांटिक दृश्य हो, हास्य हो या गंभीर परिस्थिति, उनका व्यक्तित्व स्क्रीन पर काफी प्रभावशाली रहता है।
भावनाओं की तीव्रता
खुशी और प्रेम के साथ-साथ गुस्सा, दुख, असुरक्षा और पारिवारिक भावनाओं को भी वह काफी तीव्रता से व्यक्त करती हैं।
किरदार के अनुसार बदलाव
दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे की सिमरन, कुछ कुछ होता है की अंजली, फना की जूनी और माय नेम इज़ खान की मंदिरा जैसे किरदारों में उनके अभिनय का अंदाज एक जैसा नहीं है।
कम मेकअप, ज्यादा अभिनय वाली अपील
उनके कई लोकप्रिय प्रदर्शनों में उनकी पहचान केवल ग्लैमरस रूप से नहीं, बल्कि चेहरे के भाव, आवाज और व्यक्तित्व से बनी।
कम संवाद में भी प्रभाव
कई दृश्यों में वह संवाद से ज्यादा अपनी आंखों और चेहरे के भाव से स्थिति स्पष्ट कर देती हैं।
कमियों को भी अभिनय काहिस्सा बनाना
काजोल का अभिनय हमेशा अत्यधिक नियंत्रित या “परफेक्ट” दिखाई देने की कोशिश नहीं करता। कभी-कभी उनकी स्वाभाविक हंसी, आवाज का उतार-चढ़ाव या चेहरे की सहज प्रतिक्रिया ही दृश्य को वास्तविक बना देती है।
काजोल की सबसे बड़ी ताकत उनकी स्वाभाविकता भावनात्मक तीव्रता और स्क्रीन पर अपने व्यक्तित्व की मजबूत उपस्थिति है। वह किरदार को केवल निभाने के बजाय उसमें अपनी सहज ऊर्जा मिला देती हैं। यही बात उन्हें हिंदी सिनेमा की कई अभिनेत्रियों से अलग पहचान देती है।

