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अधूरे जज्बात

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डॉ. राजीव डोगरा

मैं मंदिर गया
मैं मस्जिद गया
मेरी रगों में
मोहब्बत का गीत
फिर भी
ज़रे ज़रे में
बहता गया ।

इश्क विश्क
थोड़ा-थोड़ा
हम भी
किसी न किसी से
करते रहे
इसीलिए गमों का
बोझ उठाए फिरते रहें।

कभी किसी को
समझाया
मान अपना
कभी खुद को
समझाया
हमदर्द
मान अपना

(युवा कवि, लेखक व हिंदी अध्यापक। पता-गांव जनयानकड़, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश, पिन कोड -176038)

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Author: speedpostnews

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