हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव संपन्न हो गए हैं। दोनों दलों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लगभग साढ़े तीन हजार पंचायतों में से 2400 पंचायत प्रधान और 2300 उपप्रधान कांग्रेस के जीतने का दावा किया है। नगर परिषदों और नगर पंचायतों में मुकाबला बराबरी का बताया गया। कांग्रेस के लिए अच्छी बात यह है कि उसने मंडी में भी कुछ स्थानीय निकायों में जीत दर्ज की, जहां दस में से नौ विधायक भाजपा के हैं। सबसे बड़े जिला कांगड़ा में भी परिणाम कांग्रेस के लिए अच्छा बताया गया। इसकी खुशी कांग्रेस के नेताओं के चेहरों पर दिखी भी। पंचायत समिति परिणाम से भी कांग्रेस संतुष्ट दिख रही है। सबसे ज्यादा चर्चा जिला परिषद की लेकर है।
जिला परिषद में भाजपा ने बाकायदा टिकट बांटे थे। लगभग हर सीट पर प्रत्याशी उतारे थे। कांग्रेस ने जिला परिषद में टिकट नहीं बांटे थे। कुछ विधायकों ने अपने हलकों में प्रत्याशियों को समर्थन दिया था। वैसे प्रदेश में ओवरआल परिणाम में भाजपा ने 250 में से 140 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा किया है। पर शाहपुर में कांग्रेस का जिला परिषद में शानदार प्रदर्शन रहा है। चार में से तीन वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशी जीते हैं। प्रदेश में कांग्रेस के मंत्रियों व विधायकों के हलकों में इतना शानदार प्रदर्शन कम ही हलकों में रहा है। पठानिया जिला परिषद चुनाव के दौरान लगातार कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों के संपर्क में रहे। उनसे समन्वय करते रहे। लोगों से सुबह से लेकर रात तक मिलते रहे। पार्टी प्रत्याशियों का समर्थन करने की अपील करते रहे। इसका ही असर है कि शाहपुर में कांग्रेस प्रत्याशियों ने शानदार प्रदर्शन किया। अब चुनाव के बाद भी पठानिया हर दिन विजयी प्रत्याशियों का हर दिन स्वागत कर रहे हैं। इससे निश्चित रूप से शाहपुर में कांग्रेस और मजबूत होगी। अब केवल सिंह पठानिया को चंबा में जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनाने का जिम्मा मिलना पार्टी में उनके बढ़ते कद का संकेत है।
आठ जिलों में भाजपा के जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बन सकते हैं। कांग्रेस चार जिलों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनाने की स्थिति में आ सकती है। चंबा में कांग्रेस को बहुमत मिल गया है। तीन अन्य जिलों में निर्दलीयों व अन्यों का समर्थन मिला तो कांग्रेस कब्जा जमा सकती है। वर्ष 2021 के चुनाव में भाजपा का नौ जिलों में जिला परिषद पर कब्जा था। कांग्रेस ने जिला परिषद में प्रत्याशी ही नहीं उतारे थे तो इस चुनाव को किसी भी तरह से भाजपा की जीत नहीं माना जा सकता।


