-डॉ. राजीव डोगरा, युवा कवि, लेखक व हिंदी अध्यापक
श्मशान की राख को
सीने से लिपटाए फिरता हूँ,
महाकाल का भक्त हूँ
उनका नाम लिए फिरते हूँ,
मैं चुपचाप
सभी की सुनता हूं
किसी को कुछ बोलता नहीं।
आदेश है माँ महाकाली का
बेमतलब इसलिए
किसी को सताता नहीं।
गुर्राता है कोई तो
मैं चुप रहता हूँ
फिर भी बेमतलब किसी को
मौत की नींद सुलाता नहीं।
खामोशियां हैं बहुत दफन
मेरे इस सीने में
मगर अपनी मां काली के अलावा
किसी को सुनाता नहीं।
(पता-गांव जनयानकड़, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश, पिन कोड -176038, Mail : rajivdogra1@gmail.com)
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