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दिल्ली पुलिस की वैधानिक कार्रवाई में हस्तक्षेप संघीय ढांचे पर प्रहार, दोषियों को संरक्षण देना अक्षम्य : जयराम

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शिमला : भारतीय जनता पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में लोक भवन में हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मिला और एआई इम्पैक्ट समिट 2026 प्रकरण में दिल्ली पुलिस की वैधानिक कार्रवाई में हस्तक्षेप तथा प्रदेश सरकार द्वारा पुलिस तंत्र के कथित राजनीतिक दुरुपयोग के संबंध में विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

राज्यपाल से भेंट के पश्चात मीडिया से बातचीत करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट ने विश्व पटल पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी। 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों की उपस्थिति में भारत की छवि सशक्त रूप से उभरी। किंतु इसी मंच पर यूथ कांग्रेस नेताओं द्वारा अर्धनग्न प्रदर्शन कर देश की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के निर्देश पर हुआ। उन्होंने कहा कि पुलिस की इस मशक्कत का एक कारण दिल्ली पुलिस द्वारा होटल के जब्त डीवीआर और दस्तावेजों को हासिल करना था क्योंकि डीवीआर से ही सभी साजिशकर्ताओं के राज खुलने का डर है। इस दौरान उनसे कौन मिला, उन्हें कौन पहुंचाया? उन्हें किसने सुविधाएं दिलवाई यह सब सामने आने से सरकार बेनकाब हो जाती।

जयराम ठाकुर ने कहा कि इस राष्ट्रविरोधी कृत्य के संबंध में दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज हुई और दिल्ली पुलिस ने विधिसम्मत कार्रवाई प्रारंभ की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में शामिल कुछ यूथ कांग्रेस नेताओं को हिमाचल सदन में शरण दी गई तथा मुख्यमंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि कमरों की बुकिंग मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से हुई थी। “यह स्पष्ट संकेत है कि संरक्षण संगठित तरीके से दिया गया,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि जब दिल्ली पुलिस को साक्ष्य मिले कि कुछ आरोपी हिमाचल प्रदेश में छिपे हैं, तो पुलिस रोहड़ू के चांशल वैली होटल पहुँची और सौरभ सिंह (अमेठी, उत्तर प्रदेश), अरवाज (कानपुर) तथा सिद्धार्थ (मध्य प्रदेश) को गिरफ्तार किया। जयराम ठाकुर ने प्रश्न उठाया कि इनका स्थायी संबंध हिमाचल से नहीं होने के बावजूद वे यहाँ कैसे पहुँचे? “क्या उन्हें राजनीतिक संरक्षण और सरकारी संसाधनों के माध्यम से सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया गया?” उन्होंने पूछा।
उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मपुर पहुँचने पर दिल्ली पुलिस को असंवैधानिक तरीके से रोका गया, रात 8:11 बजे उनके विरुद्ध अपहरण की एफआईआर दर्ज की गई, जबकि उनके पास वैधानिक दस्तावेज, सीजर रिपोर्ट और न्यायालयीन आदेश थे। मजिस्ट्रेट द्वारा ट्रांजिट रिमांड दिए जाने के पश्चात भी दिल्ली पुलिस को रोका गया और वाहन सीज करने की कोशिश की गई। लगभग 24 घंटे तक टकराव की स्थिति बनी रही। “यह दो राज्यों की पुलिस को आमने-सामने खड़ा करना संघीय ढांचे पर सीधा आघात है,” उन्होंने कहा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने राजनीतिक कारणों से पुलिस तंत्र का उपयोग किया है तो यह संविधान की शपथ का उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के इशारे पर हिमाचल सरकार कार्य कर रही है और देवभूमि को राजनीतिक शरणस्थली बना दिया गया है।
जयराम ठाकुर ने राज्यपाल से मांग की कि इस पूरे घटनाक्रम की केंद्र सरकार के माध्यम से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की स्वतंत्र जांच हो तथा दोषी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और कानून के शासन का है।
प्रतिनिधिमंडल में विधायक विनोद कुमार, बलबीर वर्मा, जीत राम कटवाल, पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, प्रदेश पदाधिकारी कुसुम सदरेट, कर्ण नंदा, रमा ठाकुर, सुदीप महाजन, जिला अध्यक्ष केशव चौहान, प्रत्याशी संजय सूद, मंडल अध्यक्ष रजीत पंडित, संजीव चौहान, नगर निगम पार्षद एवं अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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Author: speedpostnews

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