Home » साहित्य जगत/ब्लाग » राह-ए-तर्क

राह-ए-तर्क

Facebook
Twitter
WhatsApp

तर्कों की कसौटी पर बग़ावत करना सीखिए,              जवानी हाँ में हाँ मिलाने के लिए नहीं।

हर फ़ैसले को आँख मूँद कर मान लेना क्या,
ज़माना यूँ ही सिर झुकाने के लिए नहीं।

अगर सच आईना दिखाए तो टूटे क्यों,
ये चेहरा सिर्फ़ दिखाने के लिए नहीं।

जो खामोश रह गया डर के साए में उम्र भर,
वो दिल किसी को जगाने के लिए नहीं।

कदम बढ़ाइए, राहें खुद बनेंगी एक दिन,
ये वक़्त हाथ पर हाथ धरने के लिए नहीं।

जो सोच विरासत में मिली है उसे परखिए,
हर बात बिना तर्क माने के लिए नहीं।

साहिल शर्मा, ग्राम बाहल अर्जुन, डाकघर चकमोह,  तहसील धटवाल, जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश.   मोबाइल : 85447 05033

speedpostnews
Author: speedpostnews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें