गरीबी का अर्थ केवल आर्थिक अभाव नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मानजनक जीवन तक पहुंच का न होना भी है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों परिवार ऐसे हैं, जिनके पास पक्के मकान, सुरक्षित पेयजल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। शहरों में भी झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोग रोज़ाना की मजदूरी पर निर्भर हैं और महंगाई उन्हें और मुश्किल में डाल देती है।
सरकार ने गरीबी उन्मूलन के लिए मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, खाद्य सुरक्षा कानून, आयुष्मान भारत और कौशल विकास जैसी योजनाएं लागू कीं। इनसे कुछ हद तक सुधार हुआ, लेकिन स्थायी समाधान के लिए रोज़गार सृजन, कृषि सुधार, उद्योगों का विस्तार और शिक्षा में निवेश आवश्यक है।
भारत का सपना केवल राजनीतिक आजादी का नहीं था, बल्कि आर्थिक और सामाजिक समानता का भी था। जब तक हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन, समान अवसर और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक गरीबी से पूर्ण आजादी अधूरी रहेगी। वास्तविक स्वतंत्रता तभी मानी जाएगी जब हर भारतीय के जीवन से अभाव और भूख का अंत हो जाए।


