सपना सच करने की इच्छा!
जब हुआ करते थे छोटे-छोटे,
सपने हुआ करते थे बड़े-बड़े,
सोचा तो बहुत था कि करेंगे अपने सपने सच,
परंतु अब पता लगा है जिंदगी का असल सच।
दिल करता है सब भूल कर ले-लें संन्यास,
असल में कितना बड़ा है यह संसार,
लगता था कि बहुत आसान होगा यह काम,
परंतु अब हो रहा है कठिनाइयों का ज्ञान।
अब उन लोगों को देखकर होता है गर्व,
जो ले जाते हैं अपने कर्मों का फल,
काश मैं भी अपने माता-पिता को करवा पाऊं खुद पर गर्व,
काश मैं खोज पाती विजय को हासिल करने का हल।
–मन्नत खत्री, कक्षा दसवीं ए, जीडी गोएंका पब्लिक स्कूल ढगवार, धर्मशाला, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश
Author: speedpostnews
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