तर्कों की कसौटी पर बग़ावत करना सीखिए, जवानी हाँ में हाँ मिलाने के लिए नहीं।
हर फ़ैसले को आँख मूँद कर मान लेना क्या,
ज़माना यूँ ही सिर झुकाने के लिए नहीं।
अगर सच आईना दिखाए तो टूटे क्यों,
ये चेहरा सिर्फ़ दिखाने के लिए नहीं।
जो खामोश रह गया डर के साए में उम्र भर,
वो दिल किसी को जगाने के लिए नहीं।
कदम बढ़ाइए, राहें खुद बनेंगी एक दिन,
ये वक़्त हाथ पर हाथ धरने के लिए नहीं।
जो सोच विरासत में मिली है उसे परखिए,
हर बात बिना तर्क माने के लिए नहीं।
साहिल शर्मा, ग्राम बाहल अर्जुन, डाकघर चकमोह, तहसील धटवाल, जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश. मोबाइल : 85447 05033
Author: speedpostnews
Post Views: 49



