यदि आप किसी धार्मिक यात्रा पर गए हैं और भूस्खलन के कारण फंस गए हैं। मोबाइल भी काम नहीं कर रहे हैं। हजारों लोग फंसे हैं। ऐसी आपात स्थिति में धैर्य और सामूहिक सहयोग सबसे बड़ी सुरक्षा होती है।
1. सुरक्षा और स्थान चुनना
-किसी स्थिर और ऊँचे स्थान पर रुकें, भूस्खलन की ढलान या नदी किनारे से दूर रहें।
-खुले इलाक़े में रहें, जहाँ पत्थर या मिट्टी गिरने की संभावना न हो।
-यदि प्रशासन द्वारा सुरक्षित शरण स्थल बनाया गया हो, तो वहीं जाएँ।
2. भोजन और पानी का प्रबंधन
-अपने पास मौजूद भोजन को बाँटकर लंबे समय तक चलाने की कोशिश करें।
-एक साथ सब न खाएँ, छोटे-छोटे हिस्सों में लें।
-साफ पानी न मिले तो बारिश का पानी इकट्ठा करें या कपड़े से छानकर पिएँ।
3. स्वास्थ्य और स्वच्छता
-भीगने से बचें, शरीर को गर्म और सूखा रखें।
-समूह में रहें, अकेले न निकलें।
-खुले में मल-मूत्र न करें, दूर और सुरक्षित जगह चुनें ताकि बीमारी न फैले।
4. मनोबल और सामूहिक सहयोग
-घबराएँ नहीं, अफवाह न फैलाएँ।
-बच्चों और बुज़ुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
-समूह में मिलकर काम करें—भोजन बाँटना, बीमारों की मदद करना, रात में बारी-बारी से जागना।
5. प्रशासन और बचाव दल तक पहुँच
-मोबाइल काम न करे तो ऊँचाई पर जाकर सिग्नल मिलने की कोशिश करें।
-यदि संभव हो तो पेड़ या चट्टानों पर साफ कपड़ा या आग जलाकर संकेत दें।
-बचाव दल आने पर धैर्य से उनका निर्देश मानें।
घबराने के बजाय सामूहिक अनुशासन और संसाधनों के सही बंटवारे से ही जीवित रहना संभव है।
सुरक्षित स्थान पर रहें, भोजन-पानी का संतुलित उपयोग करें और प्रशासन के बचाव अभियान का धैर्य से इंतजार करें।



