शिमला : कस्टमाइज्ड पैकेज के नाम पर प्रदेश की संपदा को हमारी सरकार ने लुटने नहीं दिया। मार्केट रेट पर उद्यमियों को प्लॉट आवंटित कर रहे हैं। पूर्व भाजपा सरकार में कस्टमाइज्ड पैकेज के नाम पर प्रदेश की संपदा लुटाई गई।
हमारी सरकार टेंडर आवंटन में नहीं पड़ती, यह पूर्व सरकार में होता रहा। किसी भी व्यक्ति ने कुछ भी गलत किया होगा तो उसे सलाखों के पीछे भेजेंगे।
बजट अभिभाषण पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह का सदन में जवाब। बजट में कुछ भी नहीं छिपाया गया, सच सामने रखा है। मंत्रिमंडल सदस्यों से चर्चा के बाद रियल टर्म में बजट प्रस्तुत किया। पूर्व के बजट में 3000-4000 करोड़ रुपये का होल हुआ करता था, इस राशि को योजनाओं में दर्शाया जाता था, लेकिन वास्तविकता में यह राशि होती ही नहीं थी।
पूर्व भाजपा सरकार ने प्रदेश की संपदा का दुरुपयोग किया, यह हमारी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद पाया, एक महीने तक मंत्रिमंडल विस्तार नहीं किया। पूर्व जयराम सरकार को 70 हजार करोड़ रुपये RDG और जीएसटी प्रतिपूर्ति के मिले, लेकिन जयराम जी प्रदेश की वित्तीय स्थिति को सुधार नहीं सके। बावजूद इसके 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गए, जमकर मुफ्त की रेवड़ियां पूर्व सरकार ने बांटी।
हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति को श्रीलंका जैसा बनाकर पूर्व जयराम सरकार छोड़कर गई। जब चौथे बजट में ऑल्टो गाड़ी की बजाय इलेक्ट्रिक गाड़ी में आया तो यह संदेश दिया कि हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। हिमकेयर योजना में प्रदेश की संपदा को लुटाया गया, मंडी, लुधियाना तक हिमकेयर में राशि का दुरुपयोग किया गया। पूर्व सरकार ने 442 करोड़ रुपये खर्च कर 370 करोड़ रुपये का इलाज किया। हमारी सरकार ने तीन वर्ष में 960 करोड़ रुपये का इलाज हिमकेयर में किया। हिमकेयर का पैसा रोगी कल्याण समिति में गया, उसका कोई ऑडिट ही नहीं है।
हिमकेयर योजना में हुई गड़बड़ी की सरकार ने विजिलेंस जांच के निर्देश दिए हैं, रोगी कल्याण समिति के खर्च की भी जांच करा रहे हैं। हिमकेयर योजना के तहत इलाज के लिए एक कार्ड सरकार जारी करेगी, उसके तहत मरीज पूरा इलाज करवा सकेंगे। हम सत्ता में संसाधनों को लुटाने नहीं आये, पूर्व सरकार ने संपदा को लुटाया।
मंडी में जयराम जी अपने मेडिकल कॉलेज में MRI की मशीन तक नहीं लगा पाए, हम लगाने जा रहे हैं। मंडी में नेरचौक मेडिकल कॉलेज के बाहर एक निजी अस्पताल में MRI मशीन लगी है, लोगों को वहां 3000 से 5000 रुपये में MRI करवाने पड़े। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र ने कहा कि हिमकेयर के तहत 3000 से 5000 रुपये में MRI हुए।
हिमकेयर के तहत 1100 करोड़ रुपये पूर्व सरकार ने लुटा दिया। हमने तय किया है कि राशि को नहीं लुटने देंगे और अपनी मशीनें खरीदेंगे। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद प्रदेश की आर्थिक स्थिति और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम को पता ही नहीं लगा कि मेडिकल कॉलेज में MRI मशीन नहीं है और निजी अस्पताल में लगी हुई है।
हमने विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं, उसकी रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई करेंगे। हिमकेयर बहुत बड़ा घोटाला है। वित्तीय अनुशासन के तहत अगर पूर्व जयराम सरकार ने कार्य किया होता तो प्रदेश पर इतना कर्ज न चढ़ता। पूर्व सरकार की तुलना हम अधिक कर्ज लौटा रहे हैं।
5000 बीघा जमीन 1 रुपये के कस्टमाइज्ड पैकेज के तहत पूर्व सरकार ने दे दी, यह संपदा को लुटाना ही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जयराम जी दिल्ली में प्रधानमंत्री जी से मिले, लेकिन उनके सामने मुंह नहीं खोल सके। उन्होंने 1500 करोड़ रुपये देने और RDG बहाल करने की मांग तक नहीं रखी। जयराम जी उस पर कोई बयान तक नहीं दे पाए। जनता के साथ खड़ा न होने वाला विपक्ष सत्ता में आने के सपने छोड़ दे।
बिजली बोर्ड को पूर्व सरकार के समय 2200 करोड़ रुपये सब्सिडी मिलती थी। हमने उसे कमकर 1200 करोड़ रुपये किया। सरकार ने आज ही फैसला किया है कि एक गरीब परिवार को दो मीटर पर सब्सिडी दी जाएगी। हमारी 8000 करोड़ रुपये RDG एक वर्ष के लिए न काटी जाती तो 2027 की जगह 2026 में ही आत्मनिर्भर हो जाते।
हमारी सरकार लहसुन, गुरनू चाय पर भी MSP इसी वर्ष निर्धारित करेगी।
हमारे पास सब कुछ है, सिर्फ दिशा की कमी थी। हमारी सरकार ने उस दिशा को पकड़ा है। व्यवस्था परिवर्तन चीख-चीख कर नहीं होता, फैसले लेने पड़ते हैं। व्यवस्था परिवर्तन के तहत फैसलों को धरातल पर उतारने में समय लगता है, लेकिन हमें खुशी है कि हम निर्णयों को साकार करने में सफल हुए हैं। अगले बजट तक मेडिकल कॉलेजों व शिक्षा क्षेत्र के अधिकांश खाली पदों को भर दिया जाएगा।
आर्थिक इमरजेंसी का ढिंढोरा पीटने वाले विपक्ष को शर्म आनी चाहिए। कहाँ हैं इमरजेंसी, जब नौकरियां निकल रही हैं, वेतन-पेंशन मिल रही है। हमारी सरकार वित्तीय स्थिति मजबूत होने पर विधायक निधि बढ़ाने पर भी विचार करेगी।
अनाथ व विधवा कल्याण सेस लगाने का अधिकार हमने विधानसभा से लिया है, अभी एक्ट बनना है। उसके बाद निर्णय लेंगे सेस लगाना है या नहीं पेट्रोल, डीजल पर। यह सेस की राशि अनाथ व विधवा कल्याण सेस कोष में जाएगी, जिसे यह वर्ग एक्ट के प्रावधानों के तहत क्लेम भी कर सकेंगे। मैं आज की सोचकर अच्छे काम करता हूँ, कल की नहीं। यही मेरा कर्म है, यही जुनून।


